बातचीत के लिए अच्छे व्यक्ती हैं बावनकुले

सेना उबाठा सांसद संजय राऊत ने की तारीफ

नागपुर/दि.15- शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद संजय राऊत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले की अप्रत्याशित रूप से प्रशंसा करते हुए उन्हें संवाद के लिए अच्छा व्यक्ति बताया है. राऊत के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.
नागपुर में 18 जुलाई को आयोजित होने वाले शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के ‘रामरक्षा पठण’ कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित पदाधिकारी बैठक में संजय राऊत और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कार्यकर्ताओं से संवाद किया. इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले को लेकर दोनों नेताओं ने सकारात्मक टिप्पणी की. बैठक में कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा के दौरान संजय राऊत ने कहा कि चंद्रशेखर बावनकुले अन्य दलों के नेताओं के साथ भी अच्छे संबंध रखते हैं और संवाद स्थापित करने में सक्षम नेता हैं. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में भाजपा के भीतर कुछ आंतरिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. राऊत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिनों पहले उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यदि दिल्ली की राजनीति में जाते हैं, तो उनके संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चंद्रशेखर बावनकुले का नाम सामने आ सकता है. बैठक में मौजूद अंबादास दानवे ने भी बावनकुले की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सकारात्मक सोच वाले नेता हैं और विधानसभा या परिषद में कभी नकारात्मक भूमिका नहीं अपनाते. दानवे के अनुसार, बावनकुले सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने में विश्वास रखते हैं.
बता दे कि, उद्धव ठाकरे गुट की ओर से 18 जुलाई को नागपुर के राम मंदिर परिसर में सामूहिक रामरक्षा पठण का आयोजन किया गया है. अयोध्या राम मंदिर की दान राशि में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित इस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राऊत समेत विदर्भ के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे. कार्यक्रम के बाद एक सार्वजनिक सभा भी आयोजित की जाएगी.
भाजपा पर लगातार आक्रामक रुख अपनाने वाले संजय राऊत द्वारा चंद्रशेखर बावनकुले की खुलकर प्रशंसा किए जाने से राजनीतिक विश्लेषकों के बीच नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि इसे केवल व्यक्तिगत संबंधों और संवाद क्षमता की सराहना माना जा रहा है, फिर भी राऊत के बयान को महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा किसी भाजपा नेता की सार्वजनिक प्रशंसा दुर्लभ होती है, ऐसे में राऊत और दानवे के बयान ने राज्य की राजनीति में नया विमर्श छेड़ दिया है.

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