मुंबई के आज़ाद मैदान में पान व्यापारियों का महासागर
7 लाख व्यापारियों ने निकाला विशाल मोर्चा

* धारा 328 और मकोका के कथित दुरुपयोग के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन
* आजीविका और सम्मान की लड़ाई बताई
* महाराष्ट्र पान व्यापारी महासंघ ने सरकार से की कार्रवाई रोकने और व्यापारियों को संरक्षण देने की मांग
मुंबई/दि.15- महाराष्ट्र में पान व्यवसाय से जुड़े लाखों व्यापारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को मुंबई के ऐतिहासिक आज़ाद मैदान में विशाल प्रदर्शन किया. महाराष्ट्र पान व्यापारी महासंघ के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में राज्यभर से आए पान विक्रेताओं और व्यापारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया. महासंघ के अनुसार, इस आंदोलन में लगभग सात लाख पान व्यापारी शामिल हुए और उन्होंने छोटे व्यापारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 328 तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के कथित दुरुपयोग के विरोध में जोरदार आवाज उठाई. आंदोलन के दौरान व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि पान मसाला और संबंधित उत्पादों के व्यापार से जुड़े छोटे दुकानदारों पर गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई करना बंद किया जाए. उनका कहना था कि इससे लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है.
* राज्यभर से पहुंचे व्यापारी
मुंबई के अलावा नागपुर, अमरावती, पुणे, नाशिक, औरंगाबाद, कोल्हापुर, अकोला, बुलढाणा, यवतमाल, वर्धा तथा अन्य जिलों से बड़ी संख्या में पान विक्रेता और व्यापारी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे. आज़ाद मैदान में सुबह से ही व्यापारियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल व्यापारिक हितों के लिए नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए है, जो पीढ़ियों से पारंपरिक पान व्यवसाय पर निर्भर हैं.
* धारा 328 और मकोका लगाने का विरोध
पान व्यापारी महासंघ का मुख्य विरोध उन मामलों को लेकर है जिनमें पान मसाला अथवा संबंधित उत्पादों की बिक्री करने वाले व्यापारियों पर खझउ की धारा 328 और कुछ मामलों में मकोका जैसी कठोर धाराएं लगाई गई हैं. व्यापारियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों और फुटकर विक्रेताओं को संगठित अपराधियों की तरह देखा जाना अन्यायपूर्ण है. उनका आरोप है कि कई मामलों में अत्यधिक कठोर धाराओं का उपयोग किया जा रहा है, जिससे व्यापारियों में भय का वातावरण बन गया है.
* न्यायपालिका पर जताया भरोसा
महासंघ की सभा को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रवक्ता अजीत सूर्यवंशी ने कहा कि पान व्यापारियों को देश की न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है. उन्होंने कहा कि यह मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और उन्हें उम्मीद है कि व्यापारियों को न्याय अवश्य मिलेगा. सूर्यवंशी ने कहा कि अभी तक इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं आया है, लेकिन उच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि ऐसे मामलों में धारा 328 लागू करने को लेकर गंभीर कानूनी प्रश्न मौजूद हैं. उन्होंने व्यापारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने की अपील की.
* पान मसाला को बताया कानूनी उत्पाद
अजीत सूर्यवंशी ने अपने संबोधन में कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के तहत पान मसाला को एक मानकीकृत खाद्य उत्पाद (डींरपवरीवळीशव ऋेेव झीेर्वीलीं) के रूप में मान्यता प्राप्त है. उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में पान मसाले का उत्पादन और बिक्री कानूनी रूप से की जाती है. ऐसे में महाराष्ट्र के व्यापारियों के साथ अलग प्रकार का व्यवहार क्यों किया जा रहा है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है. उनका कहना था कि यदि कोई उत्पाद कानूनी रूप से निर्मित और विक्रय किया जा रहा है, तो उसे बेचने वाले छोटे व्यापारियों पर गंभीर आपराधिक धाराएं लगाने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए.
* आजीविका और सम्मान की लड़ाई
महासंघ ने आंदोलन को केवल कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और सम्मान की लड़ाई बताया. पदाधिकारियों ने कहा कि पान व्यवसाय से राज्य में बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी, दुकानदार, मजदूर, परिवहन कर्मी और उनके परिवार जुड़े हुए हैं. यदि व्यापारियों के खिलाफ लगातार कठोर कार्रवाई होती रही तो इससे हजारों छोटे व्यवसाय बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं और बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार प्रभावित होगा.
* सरकार से प्रमुख मांगें
आंदोलन के दौरान पान व्यापारी महासंघ ने राज्य सरकार के समक्ष कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से पान व्यापारियों पर खझउ की धारा 328 लगाने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार. छोटे व्यापारियों के खिलाफ मकोका जैसी कठोर धाराओं का उपयोग बंद किया जाए. पान व्यवसाय से जुड़े वैध व्यापारियों को कानूनी संरक्षण दिया जाए. व्यापारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए. पान व्यवसाय के संबंध में स्पष्ट और एकसमान नीति लागू की जाए.
* शांतिपूर्ण तरीके से हुआ आंदोलन
आज़ाद मैदान में आयोजित यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ. बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली. व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि उन नीतियों और कानूनी प्रावधानों के खिलाफ है जिन्हें वे अपने व्यवसाय के लिए नुकसानदायक मानते हैं.
* आगे की रणनीति पर विचार
महासंघ के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है. साथ ही कानूनी लड़ाई भी जारी रखी जाएगी. फिलहाल महाराष्ट्र के पान व्यापारियों द्वारा आज़ाद मैदान में किया गया यह विशाल प्रदर्शन राज्य के व्यापारिक समुदाय के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक माना जा रहा है, जिसने पान व्यवसाय से जुड़े कानूनी और आर्थिक मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.





