सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों और स्टाफ की भारी कमी

तीसरे शैक्षणिक सत्र से पहले बढ़ी चिंता

अमरावती/दि.15– सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में तीसरा शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी चिंता का विषय बन गई ह. प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से मेडिकल शिक्षा और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
कॉलेज में एमबीबीएस के तीसरे बैच की पढ़ाई शुरू होने वाली है, लेकिन आवश्यक शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है. स्वीकृत 18 प्रोफेसरों के पदों में केवल 5 पर नियुक्ति हुई है, जबकि 13 पद खाली हैं. इसी तरह 26 एसोसिएट प्रोफेसरों में 10 और 40 असिस्टेंट प्रोफेसरों में 21 पद रिक्त हैं.

* अस्पताल के प्रशासनिक पद भी खाली
कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट, उप-मेडिकल सुपरिटेंडेंट, मेडिकल रिकॉर्ड अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद अभी तक नहीं भरे गए हैं. इसके अलावा 10 रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) के स्वीकृत पदों में केवल 7 पर नियुक्ति हुई है, जबकि 3 पद रिक्त हैं. बायोकेमिस्ट और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के पद भी खाली पड़े हैं.

* नर्सिंग स्टाफ की 85 प्रतिशत से अधिक कमी
कॉलेज और अस्पताल के लिए कुल 331 नर्सिंग पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 40 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 291 पद रिक्त हैं. यानी नर्सिंग स्टाफ का लगभग 85 प्रतिशत बैकलॉग बना हुआ है.

* शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका
शिक्षकों, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी के कारण मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, प्रायोगिक प्रशिक्षण और अस्पताल में मरीजों की देखभाल प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. चिकित्सकों और नागरिकों ने रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है.

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