रतन इंडिया में राख बिक्री की आड में जीएसटी चोरी !
कम्प्यूटराइज बिलों की बजाय हाथ से लिखी रसीदें दी जा रही

* राख की बिक्री दरों में भी जबर्दस्त मनमानी
अमरावती /दि.15- समीपस्थ नांदगांव पेठ पंचतारांकित एमआयडीसी में स्थित रतन इंडिया औष्णिक उर्जा प्रकल्प में राख बिक्री व वितरण प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है. राख की बिक्री दरों में कथित तौर पर की जानेवाली मनमानी, कम्प्यूटराइज बिलों की बजाय हाथ से लिखी हुई रसीदें जारी करने तथा जीएसटी की संभावित चोरी जैसे आरोप लगने की वजह से रतन इंडिया प्रकल्प के प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में. साथ ही इस तरह के गंभीर आरोप लगने के बावजूद जिला प्रशासन सहित संबंधित विभागों द्बारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने के चलते स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी देखी जा रही है तथा प्रशासन व संबंधित महकमों की भूमिका पर सवालिया निशान उठाए जा रहे है.
बता दें कि करीब दो माह पहले राख की दरों में अचानक की गई बढोतरी को लेकर रतन इंडिया प्रकल्प प्रबंधन तथा राख का निपटारा करनेवाली कंपनी व स्थानीय परिवहन कर्ता के बीच जबर्दस्त विवाद हुआ था. विवाद के उपरांत कुछ समय पहले राख के लिए प्रति टन 150 रूपए की बजाय 85 रूपए प्रति टन की नई दरें तय की गई थी. हालांकि आरोप लगाया गया कि यह दरें केवल स्थानीय परिवहनकर्ताओं के लिए ही लागू की गई थी. जबकि अमरावती तहसील क्षेत्र से बाहर के परिवहनकर्ताओं से अब भी प्रति टन 150 रूपए ही वसूले जा रहे है. इसमें भी सबसे गंभीर आरोप यह है कि राज प्रबंधन करनेवाली कंपनी द्बारा कम्प्यूटराइज बिल जारी करने की बजाय हाथ से लिखी हुई रसीदें दी जा रही है और इन रसीदों पर जीएसटी की रकम भी हाथ से ही लिखी जा रही है. जिसके चलते जीएसटी और राजस्व चोरी की आशंका जताई जा रही है. जिसके चलते अनुमान जताया जा रहा है कि सरकार के खजाने को लाखों रूपयों का नुकसान हो रहा है.
सूत्रों के मुताबिक इससे पहले भी राख प्रबंधन के काम से जुडी विभिन्न कंपनियों का जीएसटी चोरी का आरोप लग चुके है. परंतु करोडों रूपयों के लेनदेन में अनियमितताएं होने के आरोप लगने के बावजूद जीएसटी विभाग एवं स्थानीय प्रशासन द्बारा कभी कोई कडी कार्रवाई नहीं की गई. जिसके चलते संबंधित सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों व विभागों पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर जबर्दस्त दबाव है. हालांकि इन आरोपों की स्पष्ट तौर पर अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पायी है. हालांकि इसके बावजूद स्थानीय नागरिकों व परिवहनकर्ताओं द्बारा राख वितरण की दरों में रहनेवाली असमानता, रसीदों में रहनेवाली अनियमितता तथा जीएसटी की संदेहित चोरी जैसे मामलों में निष्पक्ष व गहन जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई जा रही है.





