अमरावती में लेप्टोस्पायरोसिस का पहला मामला

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी की सलाह

अमरावती /दि.15- मानसून के दौरान जलभराव और गंदे पानी के कारण जिले में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ गया है. जिले के परतवाड़ा क्षेत्र में इस मौसम का पहला मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. मरीज को बेहतर उपचार के लिए एम्स, नागपुर में भर्ती कराया गया है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है, जो संक्रमित चूहों के मूत्र के माध्यम से गंदे या रुके हुए पानी में फैलता है. ऐसे पानी के संपर्क में आने पर, विशेषकर यदि पैरों में घाव, दरार या खरोंच हो, तो बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.

* ये हैं प्रमुख लक्षण
इस बीमारी में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, विशेषकर पैरों में दर्द, ठंड लगना, मतली, उल्टी और आंखों का लाल होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. गंभीर स्थिति में पीलिया, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब कम होना, किडनी और लिवर को नुकसान, फेफड़ों से रक्तस्राव तथा मस्तिष्क संक्रमण जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं.

* रुके हुए पानी से रहें दूर
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान सड़कों या निचले इलाकों में जमा पानी में चलने से बचें. यदि मजबूरी में ऐसे स्थानों से गुजरना पड़े तो रबर के जूते पहनें. पैरों में घाव होने पर उन्हें वाटरप्रूफ पट्टी से ढकें और गंदे पानी के संपर्क में आने के बाद साबुन से अच्छी तरह पैर धोएं.

* गंदे पानी में कई तरह के संक्रमण का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि रुके हुए पानी में लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के अलावा अन्य बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी भी मौजूद हो सकते हैं, जो त्वचा और पाचन तंत्र से जुड़े संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

* लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं
जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने लोगों से अपील की है कि यदि बुखार, शरीर दर्द या अन्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच और उपचार कराएं. समय पर इलाज मिलने से इस बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

Back to top button