शुद्ध खवा और पनीर हुए महंगे, बाजार में बढ़ी कमी

तुकाराम मुंढे की कार्रवाई का असर

सांगली/दि.15– खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है. सांगली और मिरज में मिलावटी खवा, पनीर और घी पर कार्रवाई के बाद शुद्ध दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति घट गई है, जिससे इनके दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है.
व्यापारियों के अनुसार, पहले 240 से 250 रुपये प्रति किलो बिकने वाला पनीर अब 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. वहीं, खवा 280-300 रुपये से बढ़कर करीब 380 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. कई निजी पनीर निर्माताओं ने उत्पादन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जबकि कुछ ने अपनी दुकानें भी बंद कर दी हैं. एफडीए ने हाल के दिनों में पुणे समेत कई जिलों में छापेमारी कर लाखों रुपये का नकली खोया, पनीर और घी जब्त किया है तथा मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है. इसके बाद कई उत्पादकों ने उत्पादन कम कर दिया, जिससे बाजार में शुद्ध पनीर और खोये की उपलब्धता प्रभावित हुई है. उत्पादकों का कहना है कि एक किलो शुद्ध खोया तैयार करने के लिए लगभग छह लीटर दूध, जबकि एक किलो पनीर बनाने के लिए सात से आठ लीटर दूध की जरूरत होती है. दूध, ईंधन, मजदूरी और अन्य खर्चों को जोड़ने पर शुद्ध पनीर 350 से 400 रुपये प्रति किलो और शुद्ध खोया 300 रुपये से कम में बेचना संभव नहीं है.
खोया-पनीर उत्पादक शिवाजी पाटील ने बताया कि दूध के दाम बढ़ने से खोया और पनीर के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं और मांग में भी प्रतिदिन 400 से 500 किलो की वृद्धि हुई है. वहीं, होटल व्यवसायी राकेश खोत के अनुसार, उनके यहां पनीर का दाम 340 रुपये से बढ़कर 370 रुपये प्रति किलो हो गया है. उनका कहना है कि पिछले महीने की तुलना में पनीर 30 से 40 रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है. व्यापारियों का अनुमान है कि यदि मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जारी रही और उत्पादन सामान्य नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में शुद्ध दुग्ध उत्पादों के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है.

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