सुबह स्कूल, दोपहर बीएलओ ड्यूटी, दोहरी जिम्मेदारी से परेशान शिक्षक

प्रशासन की कार्रवाई का डर,अध्यापन का नुकसान

अमरावती/दि.15- जिले में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के चलते शिक्षकों पर एक साथ पढ़ाई और बूथ लेवल ऑफिसर की जिम्मेदारी आ गई है. सुबह स्कूल में शिक्षण कार्य और दोपहर बाद घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन करने की मजबूरी के कारण शिक्षक मानसिक और शारीरिक दबाव झेल रहे हैं. इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और चुनावी कार्य, दोनों पर पड़ रहा है.
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के अभियान के चलते सरकारी, जिला परिषद और अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को बीएलओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है. शिक्षकों का कहना है कि सुबह विद्यालय में पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें दोपहर और छुट्टियों में मतदाता सत्यापन के लिए घर-घर जाना पड़ रहा है, जिससे दोनों कार्यों के बीच संतुलन बनाना कठिन हो गया है.

* कार्रवाई का डर, बढ़ा मानसिक दबाव
शिक्षक संगठनों के अनुसार बीएलओ कार्य में छोटी-सी त्रुटि होने पर निलंबन या विभागीय जांच की चेतावनी दी जा रही है. इससे शिक्षकों में भय और तनाव का माहौल है. वहीं, नए शैक्षणिक सत्र के बावजूद नियमित और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है.

* मैदानी कार्य में भी कई मुश्किलें
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और बुआई का मौसम होने से अधिकांश लोग दिनभर खेतों में रहते हैं. घरों पर केवल बुजुर्ग या छोटे बच्चे मिलते हैं, जिन्हें परिवार के मतदाताओं की पूरी जानकारी नहीं होती. दूसरी ओर शहरों में नौकरी या व्यवसाय के कारण अधिकांश घर दिनभर बंद रहते हैं. ऐसे में शिक्षकों को एक ही परिवार के मतदाताओं का सत्यापन करने के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं. इससे निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करना उनके लिए चुनौती बन गया है.

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