विवाहित बेटी को भी मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार

नागपुर हायकोर्ट का ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण फैसला

नागपुर/दि.15- बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की विवाहित बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का अधिकार है. केवल विवाह हो जाने के आधार पर उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. न्यायमूर्ति वाई. जी. खोब्रागड़े और सुशील घोडेस्वार की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विवाहित बेटी भी अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा होती है. ऐसे में सिर्फ उसकी वैवाहिक स्थिति को आधार बनाकर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना लिंग आधारित भेदभाव है, जो संविधान की समानता की भावना के विपरीत है.
चंद्रपुर जिले के ताडाली निवासी कर्मचारी कवडू वानशिंगे के निधन के बाद उनकी बेटी तनुजा झाडे ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. लेकिन वेकोलि ने राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के नियमों का हवाला देते हुए 10 अप्रैल 2025 को आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया कि विवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र नहीं है. इसके बाद तनुजा झाडे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस निर्णय को चुनौती दी.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विवाह के बाद भी बेटी अपने माता-पिता के परिवार से भावनात्मक और कई मामलों में आर्थिक रूप से जुड़ी रहती है. इसलिए केवल विवाहित होने के कारण उसे अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना उचित नहीं है. अदालत ने सवाल उठाया कि यदि विवाहित पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जा सकता है, तो विवाहित पुत्री को इससे वंचित रखने का कोई औचित्य नहीं है. यह स्पष्ट रूप से लैंगिक भेदभाव है. खंडपीठ ने वेकोलि द्वारा जारी विवादित आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि तनुजा झाडे के आवेदन पर उसकी योग्यता और पात्रता के आधार पर दो महीने के भीतर नया निर्णय लिया जाए.00000

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