महाराष्ट्र में 30 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट

एक सरकारी फैसले से बढ़ी चिंता

मुंबई/दि.22 – महाराष्ट्र सरकार के एक हालिया निर्णय के बाद राज्य के करीब 30 हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है, जिससे शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्थिति सरकार की ‘संरचना मान्यता’ (स्टाफ अप्रूवल) और छात्र संख्या आधारित नीति के कारण पैदा हुई है. नई व्यवस्था के तहत जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है, वहां शिक्षकों को ‘अतिरिक्त’ घोषित किया जा रहा है.
* क्या है पूरा मामला?
राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल सामने आए हैं, जहां छात्र कम और शिक्षक ज्यादा हैं. इस असंतुलन के चलते शिक्षा विभाग ने कम नामांकन वाले स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अतिरिक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की है. जिसके साथ 20 से कम छात्र संख्या वाले स्कूल विशेष रूप से प्रभावित होंगे. ऐसी शालाओं के शिक्षकों का अन्य स्कूलों में समायोजन (ट्रांसफर) किया जाएगा. कुछ मामलों में वेतन रोकने की शिकायतें भी सामने आई हैं.
* कितनी बड़ी है समस्या?
राज्य में करीब 30 हजार शिक्षक ‘अतिरिक्त’ होने की स्थिति में हैं. आगे चलकर यह संख्या और बढ़ सकती है. करीब 80 हजार शिक्षकों के समायोजन की संभावना जताई जा रही है.
* कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति के पीछे कई वजहें हैं, जैसे सरकारी स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या, निजी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का खाली होना.
* आगे क्या होगा?
सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को हटाना नहीं, बल्कि जहां जरूरत ज्यादा है वहां उनका पुनर्विनियोजन करना बताया जा रहा है. हालांकि, इस प्रक्रिया से हजारों शिक्षकों में असुरक्षा और असंतोष का माहौल बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संतुलित नीति नहीं अपनाई गई तो इसका असर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

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