35 हजार कुत्ते, चार साल में सिर्फ 4 हजार की नसबंदी

अमरावती में आवारा कुत्तों का आतंक

* ठेकेदार का भुगतान अटका तो अभियान ठप
* 48 लाख रुपये के भुगतान विवाद में मार्च से नसबंदी बंद
* अब सिर्फ टीकाकरण कर उसी जगह छोड़े जा रहे कुत्ते
* बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
अमरावती/दि.3 – अमरावती शहर में तेजी से बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या अब नागरिकों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है. नगर निगम का पशु वैद्यकीय विभाग इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाने में पूरी तरह विफल नजर आ रहा है. हालात यह हैं कि शहर में वर्तमान में 30 से 35 हजार आवारा कुत्तों के होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि पिछले चार वर्षों में केवल 4 हजार कुत्तों की ही नसबंदी हो सकी है. मार्च 2026 से नसबंदी अभियान पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और शहर के विभिन्न इलाकों में हमलों की घटनाएं भी बढ़ रही हैं.
मनपा के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2023 में आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान शुरू किया गया था. उसी वर्ष करीब 2 हजार कुत्तों की नसबंदी की गई. वर्ष 2024 में हुई पशु गणना में शहर में 25 हजार आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे. इसके बाद कोई नई गणना नहीं हुई, लेकिन पशु चिकित्सक विभाग का दावा है कि अब यह संख्या बढ़कर 30 से 35 हजार तक पहुंच चुकी है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के 22 प्रभागों में हर गली और मोहल्ले में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं. राहगीरों, स्कूली बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों पर आए दिन हमले हो रहे हैं. इसके बावजूद मनपा का अभियान कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहा है.
मनपा ने आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनका टीकाकरण और नसबंदी करने का ठेका जीवन रक्षा एनिमल संस्था के संचालक सागर मैदानकर को दिया था. पकड़े गए कुत्तों को कोंडेश्वर रोड स्थित निगम के पशु केंद्र में ले जाकर नसबंदी की जाती थी. वर्ष 2025-26 में लगभग 2 हजार कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया. लेकिन इसके बाद पूरा अभियान विवादों में घिर गया. पशु वैद्यकीय अधिकारी डॉ. सचिन बोंद्रे रिश्वतखोरी के आरोप में एसीबी की कार्रवाई के बाद निलंबित हो गए. वहीं ठेकेदार का आरोप है कि मनपा ने उसके 48 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया. भुगतान न मिलने से मार्च 2026 से ठेकेदार ने नसबंदी का काम पूरी तरह बंद कर दिया. इसके बाद से निगम के पास नसबंदी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं रही.
परिणामस्वरूप इस वर्ष अब तक केवल 296 कुत्तों की नसबंदी हो सकी है. दूसरी ओर मनपा सिर्फ कुत्तों को पकड़कर उनका एंटी रेबीज टीकाकरण कर रहा है और पशु जन्म नियंत्रण नियमों का हवाला देते हुए उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ दिया जा रहा है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था. इसी लापरवाही का असर अब शहर में साफ दिखाई देने लगा है. पिछले महीने 15 जुलाई को प्रभाग क्रमांक 12 में एक मासूम बच्ची पर आवारा कुत्ते ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था. इस घटना के बाद शहरभर में नागरिकों का आक्रोश फूट पड़ा. विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्षदों और मनपा की शिक्षण सभापति प्रीति रेवणे ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया. दबाव बढ़ने के बाद मनपा प्रशासन ने 15 जुलाई से विशेष अभियान शुरू किया. 15 से 30 जुलाई के बीच 16 दिनों में विभिन्न प्रभागों से कुल 399 आवारा कुत्तों को पकड़ा गया. सभी का टीकाकरण किया गया, लेकिन नसबंदी न होने के कारण उन्हें फिर उसी इलाके में छोड़ दिया गया.
* ठेकेदार नहीं, इसलिए नसबंदी पूरी तरह बंद
मनपा के अधिकारियों का कहना है कि भुगतान विवाद के कारण ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है. वर्तमान में मनपा के पास नसबंदी करने की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. ऐसे में केवल टीकाकरण कर कुत्तों को वापस छोड़ना ही मजबूरी बन गई है.
* सरकारी डॉक्टरों की मदद से फिर शुरू होगा अभियान
प्रभारी पशु वैद्यकीय अधिकारी डॉ. तुषार पोहनकर ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकारी पशु चिकित्सकों की सहायता लेकर कोंडेश्वर सेंटर पर जल्द ही नसबंदी अभियान दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है. आवश्यक प्रक्रिया पूरी होते ही अभियान फिर शुरू किया जाएगा.
* 16 दिनों में ऐसे चला अभियान
तारीख प्रभाग पकड़े गए कुत्ते
15 जुलाई 12 18
16 जुलाई 14 19
17 जुलाई 04 22
18 जुलाई 03 27
19 जुलाई 05 24
20 जुलाई 06 26
21 जुलाई 07 23
22 जुलाई 09 28
23 जुलाई 08 27
24 जुलाई 11 28
25 जुलाई 15 26
26 जुलाई 18 28
27 जुलाई 02 30
28 जुलाई 01 24
29 जुलाई 16 28
30 जुलाई 10 21
कुल 399
* 9 अगस्त को नि:शुल्क टीकाकरण शिविर
मोती नगर स्थित सोपारिका फाउंडेशन द्वारा 9 अगस्त को रुक्मिणी नगर के गेट लाइफ हॉस्पिटल के पास डॉग एवं कैट वैक्सीनेशन शिविर लगाया जाएगा. संस्था ने एक हजार कुत्तों और बिल्लियों के नि:शुल्क टीकाकरण का लक्ष्य रखा है. संस्था के अध्यक्ष भार्गव चेडे के अनुसार निजी सर्वे में शहर में करीब 30 हजार आवारा कुत्ते पाए गए हैं. पालतू पशुओं का टीकाकरण कराने के इच्छुक लोग भी इस शिविर का लाभ उठा सकते हैं. इस शिविर में वैक्सीनेशन की सुविधा मनपा के पशु वैद्यकीय विभाग द्वारा की जाने वाली है.

* ऑडिट रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
मनपा की स्थायी समिति ने आवारा कुत्तों की नसबंदी योजना और संबंधित ठेका प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने का प्रस्ताव पारित किया था. समिति अध्यक्ष अविनाश मार्डीकर ने 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद रिपोर्ट समिति के सामने प्रस्तुत नहीं की गई. मार्डीकर का कहना है कि रिपोर्ट में हो रही देरी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है. उनका आरोप है कि जब शहर में 30 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं, तब हर वर्ष केवल दो हजार नसबंदी कर समस्या का समाधान नहीं हो सकता. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
* आंकड़ों में पूरी तस्वीर
– शहर में अनुमानित आवारा कुत्ते : 30 से 35 हजार
– वर्ष 2024 की पशु गणना : 25 हजार
– वर्ष 2023 से अब तक कुल नसबंदी : करीब 4 हजार
– वर्ष 2026 में अब तक नसबंदी : 296
– 15 से 30 जुलाई तक टीकाकरण : 399
– ठेकेदार का बकाया भुगतान : 48 लाख रुपये
– मार्च 2026 से नसबंदी अभियान : पूरी तरह बंद
* बड़ा सवाल
जब शहर में 35 हजार तक आवारा कुत्ते मौजूद हैं और हर साल केवल दो हजार की नसबंदी हो रही है, तो आखिर नगर निगम इस बढ़ती समस्या पर कब तक सिर्फ टीकाकरण का सहारा लेता रहेगा? भुगतान विवाद, लापरवाही और धीमी कार्रवाई का खामियाजा आखिर आम नागरिकों को ही क्यों भुगतना पड़ रहा है?

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