विधायक-प्रकाशक संघर्ष से राज्य में नया सियासी तूफान

शिवाजी कौन था?’ पुस्तक को लेकर विवाद भड़का

‘बुलढाणा /दि.23- ‘शिवाजी कौन था?’ इस पुस्तक को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब केवल मतभेदों तक सीमित न रहकर सीधे राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है. शिंदे सेना के विधायक संजय गायकवाड और प्रकाशक प्रशांत अंबी के बीच कथित फोन बातचीत की ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद इस मामले ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो गई है.
प्रा. गोविंद पानसरे द्वारा लगभग 38 वर्ष पहले प्रकाशित इस पुस्तक की भाषा शैली और प्रस्तुति पर विधायक गायकवाड ने आपत्ति जताई है. छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में एकवचन उल्लेख और इतिहास के विकृतिकरण का आरोप लगाते हुए उन्होंने संबंधित प्रकाशक से सीधे संपर्क कर कड़े शब्दों में नाराज़गी जताई, ऐसा सामने आया है. इस बातचीत में कथित धमकी भरी भाषा सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है. इसमें बेहद निम्न स्तर की भाषा के इस्तेमाल की बात कही जा रही है.
दूसरी ओर, प्रकाशक प्रशांत आंबी ने सख्त प्रतिवाद करते हुए कहा कि पुस्तक का उद्देश्य ऐतिहासिक अध्ययन है और किसी का अपमान करना नहीं है. उन्होंने बताया कि यह पुस्तक 1988 से लगातार प्रकाशित हो रही है और मतभेदों का समाधान चर्चा और पढ़ने के माध्यम से ही निकलना चाहिए. इस पूरे घटनाक्रम से राज्य में दो बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. ऐतिहासिक अस्मिता की रक्षा के नाम पर आक्रामक रुख कितना उचित है, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं आखिर कहाँ तय हों? फिलहाल यह विवाद सिर्फ एक पुस्तक तक सीमित न रहकर राजनीतिक संस्कृति, सार्वजनिक संवाद के स्तर और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को भी छूता दिखाई दे रहा है.
* कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष आक्रामक
इस पृष्ठभूमि में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विधायक की भाषा शैली की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल चिंताजनक है और प्रकाशक को तुरंत सुरक्षा दी जानी चाहिए. इससे यह विवाद सीधे सत्ताधारी और विपक्ष के टकराव में बदलता नजर आ रहा है. इस बीच बुलढाणा का नाम बदनाम करने का आरोप भी विधायक संजय गायकवाड पर लगाया गया है.
* शिवराय का अपमान बर्दाश्त नहीं- गायकवाड
इस बीच विधायक गायकवाड ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल ऑडियो को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है, लेकिन शिवराय का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इस रुख पर वे कायम हैं.

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