ढाई माह के लिए पूरे 5 लाख 87 हजार किराया!
94 कूलर्स की ‘ठंड’, बढ रहा मनपा का ‘आर्थिक वोलटेज’, आर्थिक तंगी रहने पर खर्च जरुरी

अमरावती/दि.25– हाल ही में रुफ इस नीति को चलाकर संपूर्ण राज्य का ध्यान बंटाकर 10 लाख रुपयों का पुरस्कार जीतनेवाला अमरावती महानगर पालिका प्रशासन ग्रीष्मकाल में 94 कूलर्स लगाकर प्रतिमाह 2 लाख 35 हजार रुपए किराया देनेवाला है, यह सुनकर आश्चर्य हुए बिना नहीं रहेगा. महानगर पालिका की आर्थिक हालात कमजोर स्थिति में पहुंची है, ऐसे में कूलर्स का यह खर्च सचमुच ही जरुरी है क्या, यह प्रश्न भी निर्माण हो रहा है.
महानगर पालिका के सभी 5 जोन के कार्यालयों, निर्माण कार्य विभाग, शिक्षा विभाग, ससंनर विभाग, उद्यान विभाग, नगर सचिव विभाग, प्रकाश विभाग, अग्निशामक विभाग जीएडी, जनसंपर्क कार्यालय, पीएनवाय विभाग, अकाउंट व ऑडिटिंग विभाग सहित कुछ पदाधिकारी और अधिकारियों के कैबिन में यह कूलर्स लगाए है. स्वास्थ्य विभाग को छोडकर महानगर पालिका के 35 से 36 विभागों के लिए यह कूलर्स किराए पर लिए गए है. ‘गारंटी इलेक्ट्रीकल अमरावती’ इस ठेकेदार के मार्फत यह कूलर्स किराया तत्व पर लिए गए है. 15 अप्रैल से 30 जून इस समयावधि तक यह कूलर्स लगाए गए है. प्रति कूलर 2500 रुपए प्रतिमाह, इस रेट के अनुसार इन कूलर्स का किराया महानगर पालिका ने देना है. इसके अनुसार इन कूलर्स का ढाई महिनों का 5 लाख 87 हजार रुपए इतना किराया महानगर पालिका ने देना होगा. एक ओर मनपा की आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसके बारे में लगातार बातें शुरु है. मनपा के ठेका कर्मचारियों का वेतन बीते 2-3 महिनों से प्रलंबित है. सिपाही, वाहन चालक, ठेका पद्धति के इंजीनियर्स, संगणक चालक ऐसे अनेक ठेका कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है. निर्माण विभाग से अनेक ठेकेदारों के बिल प्रलंबित है. महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (मजीप्रा) तथा महावितरण का बकाया भी मनपा की ओर है. पुराने स्वच्छता ठेकेदारों द्वारा उनके बिल की मांग शुरु ही है. मनपा की ओर ऐसा करोडों का बकाया रहने के बावजूद भी कूलर्स का यह खर्च सच में ही जरुरी है क्या, ऐसा सवाल उपस्थित हो रहा है. अनेक स्थानों पर एसी रहने के बावजूद भी पुन: कूलर लगाए गए है. महावितरण का लाखों का बकाया रहने पर महानगर पालिका सैकडों कूलर लगाकर क्या हासिल करनेवाली है, आर्थिक नियोजन के साथ कोई भी लेना-देना नहीं है, ऐसा दिखायी दे रहा है. विदर्भ में ग्रीष्मकाल प्रचंड त्रासदायक रहता है, यह बात भले ही सच है. फिर भी 94 कूलर्स लगाने की जरुरत थी क्या, यह परखकर देखनी की तकलीफ किसी ने भी नहीं ली, ऐसा दिखाई दे रहा है. इन सभी कूलर्स का किराया और कूलर्स के इस्तेमाल से आनेवाला भारी भरकम बिजली का बिल, इसके बारे में कोई भी विचार नहीं किया गया है, ऐसा दिखाई दे रहा है. एक ओर महानगर पालिका नागरिकों को कुल रुप के बारे में जागृत करने का प्रयत्न करती है और दूसरी ओर महानगर पालिका में ही बिना नियोजन के, जरुरत को परखकर नहीं देखकर सैकडों कूलर लगाए है, ऐसा विरोधाभास दिखाई दे रहा है. आर्थिक कमजोर स्थिति में पहुंची हुई महानगर पालिका को वर्तमान स्थिति में पैसे बचाने की जरुरत रहनेपर कूलर्स पर हुए इस अवास्तव खर्च पर कटौती नहीं कर सकते थे क्या, ऐसा प्रश्न भी उपस्थित किया जा रहा है.





