अमरावती में बनेगा बाल पुलिस पथक

नाबालिगों से जुड़े अपराधों पर लगेगी लगाम

अमरावती/दि.29- अमरावती शहर सहित जिले में नाबालिग बच्चों से जुड़े बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अब बाल पुलिस पथक यानि स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) का गठन किया जाएगा. यह महत्वपूर्ण निर्णय राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग के निर्देश पर लिया गया है. इसके तहत अमरावती पुलिस आयुक्तालय तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विशेष बाल पुलिस पथक कक्ष स्थापित किए जाएंगे, ताकि बच्चों से जुड़े मामलों की जांच अधिक तेज, संवेदनशील और प्रभावी ढंग से की जा सके.
राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग के सदस्य प्रवीण भुजाडे ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विशेष बाल पुलिस पथक नाबालिग लड़के-लड़कियों से जुड़े गंभीर मामलों जैसे बाल शोषण, अपहरण, बाल मजदूरी, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न की जांच को प्राथमिकता देगा. उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रत्येक जिले में अलग बाल पुलिस तंत्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसे अब अमल में लाया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि बाल न्याय अधिनियम 2015 के तहत प्रत्येक पुलिस स्टेशन में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) की स्थापना की जा रही है. इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए पुलिस तंत्र को अधिक मानवीय, संवेदनशील और बालस्नेही बनाना है, ताकि पीड़ित बच्चे बिना भय और झिझक के अपनी बात पुलिस के सामने रख सकें. इस विशेष बाल पुलिस पथक के अंतर्गत प्रत्येक थाने में एक बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (एएसआई) स्तर से कम का नहीं होगा. यह अधिकारी न केवल बच्चों से जुड़े मामलों की जांच करेगा, बल्कि पीड़ित बच्चों को उचित सहायता, परामर्श और सुरक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निभाएगा.
राज्य आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के प्रत्येक पुलिस थाने में बच्चों के लिए बालस्नेही वातावरण तैयार किया जाए. इसके लिए थानों में विशेष चाइल्ड-फ्रेंडली डेस्क या कक्ष बनाए जाएंगे, जहां बच्चों से पूछताछ या बयान दर्ज करते समय उन्हें मानसिक दबाव, भय या असहजता महसूस न हो. यह पहल बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुलिसिंग के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है.
यह विशेष पथक पीड़ित बच्चों के साथ-साथ कानून के साथ संघर्ष कर रहे बच्चों (चिल्ड्रन इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ) के मामलों को भी संवेदनशीलता से संभालेगा. साथ ही, स्वयंसेवी संस्थाओं और बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर बच्चों के पुनर्वास और संरक्षण की दिशा में भी कार्य करेगा.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय, सुरक्षित वातावरण और संवेदनशील पुलिस हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमरावती पुलिस प्रशासन इस महत्वपूर्ण निर्णय को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरह लागू करता है.

* विशेष बाल पुलिस पथक की मुख्य विशेषताएं:
– उद्देश्य – बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण, बाल विवाह, अपहरण और अवैध बाल मजदूरी के मामलों पर त्वरित कार्रवाई करना और बाल अधिकारों की सुरक्षा करना.
– स्थापना – राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग के निर्देश पर विशेष रूप से अमरावती शहर, अमरावती ग्रामीण, ठाणे ग्रामीण, मीरा-भायंदर-वसई-विरार, वाशिम और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे क्षेत्रों में, प्रत्येक थाने में एक विशेष बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो सहायक पुलिस उपनिरीक्षक के स्तर से कम का नहीं होता है.
– वातावरण – पुलिस थानों में विशेष चाइल्ड-फ्रेंडली (बाल-स्नेही) डेस्क या कक्ष स्थापित किए जाते हैं, ताकि बच्चे पुलिस के सामने भयमुक्त होकर अपनी बात रख सकें.
– कार्यवाही – ये अधिकारी पीड़ित बच्चों और कानून के साथ संघर्ष कर रहे बच्चों (विधि संघर्षित बालकों) के मामलों को संभालने के लिए संवेदनशील तरीके से कार्य करते हैं और स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के साथ समन्वय रखते हैं. ये विशेष पथक बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, मामलों को जल्दी सुलझाने के लिए जिम्मेदार हैं.

* जिले में 100 से अधिक मामले, लैंगिक अपराधों का प्रमाण अधिक
विगत एक वर्ष के दौरान बालकों पर अत्याचार व विनयभंग के करीब 100 के आसपास अपराध दर्ज किए गए. जिसमें से 75 फीसद मामलों की जांच पूरी कर दोषारोपपत्र दायर कर दिए गए. आंकडेवारी के अनुसार बच्चों के खिलाफ होनेवाले कुल अपराधों में लैंगिक अत्याचार तथा पोक्सो कानून अंतर्गत दर्ज किए जानेवाले अपराधों का प्रमाण सर्वाधिक रहने की बात दिखाई देती है.

* विशेष बाल पुलिस पथक कक्ष के चलते बाल अपराधों की जांच में गति आएगी तथा दोषसिद्धी का प्रमाण बढने में मदद मिलेगी. यह अपने-आप में एक स्तुत्य पहल है.
– वैशाली चव्हाण
सहाय्यक पुलिस निरीक्षक

* केवल कक्ष की स्थापना करने से ही काम नहीं चलेगा, बल्कि वहां पर नियुक्त कर्मचारियों का बाल अधिकार अधिनियम को लेकर संवेदनशील रहना भी जरुरी है. यह कक्ष स्थापित करने हेतु पुलिस आयुक्त एवं एसपी कार्यालय को आवश्यक निर्देश दिए गए है.
– प्रवीण भुजाडे
सदस्य, बाल हक आयोग.

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