भीषण गर्मी के चलते हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढे

एक महीने में 500 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती

* न्यूरल साइनस थ्रोम्बोसिस का खतरा भी बढा
* डॉक्टरों ने सिरदर्द को हल्के में नहीं लेने की सलाह दी
अमरावती/दि.29- अमरावती सहित पूरे विदर्भ में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. आसमान से बरसती आग अब केवल लू (हीटवेव) तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सीधे दिल और दिमाग पर हमला कर रही है. पिछले एक महीने के स्वास्थ्य आंकडों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढा दी है. जानकारी के अनुसार अमरावती संभाग के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में हार्ट अटैक, बे्रन स्ट्रोक और लू से संबंधित कुल 500 से अधिक मरीज भर्ती हुए है. इनमें 70 से ज्यादा मामले केवल हार्ट अटैक और ब्रेन स्टोक के बताए जा रहे हैं.
मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार 28 अप्रैल को अमरावती 45.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सबसे गर्म शहर रहा. वहीं विदर्भ के अन्य शहरों में भी तापमान 45 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया. मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक लू चलने की संभावना जताई हैं, जिसके बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री की मामूली गिरावट आने की संभावना है.
 गर्मी और हार्ट- ब्रेन स्ट्रोक के बीच सीधा संबंध
चिकित्सकों के अनुसार अत्याधिक गर्मी और हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियेां के बीच सीधा संबंध है. तेज गर्मी में पसीने के माध्यम से शरीर से पानी और नमक तेजी से निकल जाता है. इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है और खून गाढा होने लगता है. डॉक्टरों का कहना है कि जब खून गाढा हो जाताहै तो धमनिययों में थक्का जमने का खतरा बढ जाता है. यदि यह थक्का दिल की नसों में फंस जाए तो हार्ट अटैक और यदि यह दिमाग क पहुंच जाए तो ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है.
* ड्यूरल साइनस के थ्रोम्बोसिस के मुख्य लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार इसके लक्षण अलग- अलग हो सकते हैं, लेकिन सबसे सामान्य संकेत यह हैं तेज सिरदर्द, जो लेटने और झुकने पर बढ सकता है. दृष्टि में बदलाव, धुंधला दिखना या आंख की नस में सुजन, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, जैसे दौरे, कमजोरी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता, मानसिक स्थिति में बदलाव, भ्रम या सोचने समझने में कमी, विशेषज्ञों के अनुसार ड्यूरल साइनस थ्रोम्बोसिस के पीछे निर्जलीकरण (हिहाईड्रेशन ) भी हो सकता है. विशेषज्ञो ंने इसे न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी बताया है और कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक तेज सिरदर्द के साथ उपर बताए लक्षण दिखे तो तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाना चाहिए.
* स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल अलर्ट मोड पर
लगातार बढ रहे मामलों को देखते हुए शहर के सरकारी व निजी अस्पताल अलर्ट मोड पर हैं. डॉक्टरों ने नागरिकों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और किसी भी तरह के सीने में दर्द, चक्कर, कमजोरी या तेज सिरर्द महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है. विदर्भ में तापमान का यह प्रकोप अभी भी जारी है और आनेवाले दिनों में यदि सावधानी नहीं बरती गई, तो मरीजों की संख्या और बढने की आशंका जताई जा रही है.

* गर्मी के बढते प्रभाव के बीच शहर में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के दो गंभीर मामले सामने आए है.
– पहला केस
55 वर्षीय डायबिटीज मरीज को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे घर में ही बेहोश होकर गिर पडे. परिजनों ने उन्हें तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां डॉक्टरों ने मेजर हार्ट अटैक की पुष्टि की. तत्काल स्टेंट लगाने के बाद उनकी जान बचाई जा सकी.
– दूसरा केस
57 वर्षीय व्यक्ति, जो पहले से हदय रोगी थे,उन्हें अचानक सिर में तेज दर्द और धुधला दिखने की शिकायत हुई. अस्पताल में सीटी स्कैन कराने पर ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई. डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक कर्मी ने उनकी पहे से मौजूद बीमारी को जानलेवा स्तर तक बढा दिया.

* ड्यूरल साइनस थ्रोम्बोसीस का भी खतरा बढ सकता है
भीषण गर्मी में डिहाईड्रेशन के कारण केवल हार्ट अटैक और ब्रेन स्टोक ही नहीं, बल्कि एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी ड्यूरल साइनस थ्रोम्बोसीस का भी खतरा बढ सकता है. यह बीमारी मस्तिष्क की शिराओं या साइनस में रक्त का थक्का जमने की स्थिति है. इसके कारण मस्तिष्क में रक्त का प्रभाव बाधित होता है. जिससे दबाव बढता है. सूजन आती है और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है. यदि किसी को सिर में दर्द हो और बैलेंस बिगडने जैसी तकलीफ हो रही है तो उसे तुरंत अस्पताल जाकर अपना चेकअप करवाना चाहिए, क्योंकि इस प्रकार की तकलीफ में देरी से बात बिगड जाती है. गर्मी के मौसम में व्यक्ति को पानी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पीना चाहिए. एक घंटे में लगभग दो गिलास पानी पीना चाहिए. दिन भर में 15 से 20 गिलास पानी पीना चाहिए.
– डॉ. पंकज घुंडियाल,
वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट

* जरूरी हो, तो ही घर से बाहर निकले
विदर्भ में हीट डोम बना हुआ है और अधिकतम तापमान 46 डिग्री है, ऐसे हालात में हार्ट और लकवे के मरीजों को खून पतला करने की दवा किसी भी हालत में बंद नहीं करने चाहिए. भीषण गर्मी की इस स्थिति में यदि जरूरी हो तो ही दोपहर 11 से 5 बजे के बीच में घर से निकले. यदि आप घर से बाहर निकल रहे है तो सफेद अथवा हल्के रंग के कपडे पहने और हल्के रंग के कपडे से ही सिर को ढके. इसके अलावा भरपूर पानी पीए या फिर संभव हो तो नींबू पानी अथवा शरबत पीए. यदि कुछ भी नहीं हो तो पानी में शक्कर – नमक और नींबू घोलकर पी लें. गर्मी के दिनों में 6 से 7 लीटर तक पानी पूरे दिन में जरूर पीए. अगर आप घर के अंदर ही रहे हैं तो भी आपको पूरे दिन में 4 से 5 लीटर पानी जरूरी पीना चाहिए.
– डॉ. पवन ककरानिया, एमडी मेडिसीन,
निदेशक आर्कीड अस्पताल

* दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचे
जब तापमान 45 डिग्री के आसपास रहता है तो शरीर में डिहाईड्रेशन (पानी की कमी) और लू/ हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ जाता है. यदि समय रहते पहचान और उपचार न हो, तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. इससे बचाव के लिए दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचे. शरीर को पूरा हाईड्रेट रखे. रोजाना 4 से 5 लीटर पानी पीना जरूरी है. कैफिन और शराब जैसे पेय पदार्थो से बचे, क्योंकि यह शरीर को और अधिक डिहाईड्रेट कर सकते हैं. उसके बजाय छाछ, नींबू पानी, फलों का रस, ओआरएस जैसे पेय पदार्थ डिहाईड्रेशन से बचाने में मदद करते हैं. हल्के रंग के, सूती कपडे पहने, धूप से बचाव के लिए टोपी, चश्मा, सनस्क्रीन लोशन और छाते का उपयोग करें. सुरक्षित रहे, स्वस्थ रहे और गर्मियों का आनंद ले.
– डॉ. आनंद काकानी, रेडीयंट अस्पताल

 

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