वैष्णव वारकरी आध्यात्मिक बाल सुसंस्कार शिविर 1 से 16 मई तक
मुख्य मार्गदर्शक पीठासीन आचार्य दास ज्ञानेश्वर महाराज

अमरावती/दि.2- आपुलीया हिता असे जो जागता’ इस संत युक्ति को ध्यान में रखकर श्री दास ज्ञानेश्वर अध्यात्म ज्ञानपीठ अंतर्गत श्री हभप ज्ञानेश्वर महाराज इंगले उर्फ दास ज्ञानेश्वर वैष्णव वारकरी ट्रस्ट (रजि नं. ई 739) की ओर से 16 दिवसीय वैष्णव वारकरी आध्यात्मिक बाल सुसंस्कार शिविर शुक्रवार 1 मई को (वैशाख पूर्णिमा) को तीर्थक्षेत्र सोनारखेड में अत्यंत उत्साह से प्रारंभ हुआ. इस शिविर का नियोजन और नेतृत्व संस्था के संस्थापक तथा पीठासीन आचार्य गुरूवर्य श्री ह.भ.प. ज्ञानेश्वर महाराज इंगले (दास ज्ञानेश्वर) ये स्वयं कर रहे है. उन्हीं की अध्यक्षता में यह निवासी शिविर होने जा रहा है. इस उपक्रम का उद्देश्य परिसर के बच्चों पर वारकरी संप्रदाय के व नैतिक मूल्यों के संस्कार होना है. इसलिए यह शिविर लिया जा रहा है.
दैनिक प्रशिक्षण और संस्कार
पीठासीन आचार्य दास ज्ञानेश्वर महाराज के मार्गदर्शन में शिविर में सहभागी विद्यार्थियों को मृदंग वादन, गायन, कीर्तन- प्रवचन, स्वर के शास्त्रशुध्द ज्ञान, संस्कृत व्याकरण, गीता पठण और मराठी व्याकरण इस विषय का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अध्यात्म के साथ देशभक्ति, मातृ-पितृ भक्ती और नशामुक्त आदि का प्रशिक्षण देकर विद्यार्थियों के चरित्र पर श्री दास ज्ञानेश्वर अध्यात्म ज्ञानपीठ का विशेष रूप से जोर दिया जा रहा है.
गुरूवर्य महाराज के काले के कीर्तन व समापन
1 मई से शुरू हुए इस ज्ञानयज्ञ की समाप्ति 16 मई को होगी. इस संस्कार शिविर समारोह का समापन पीठासीन आचार्य गुरूवर्य दास ज्ञानेश्वर उर्फ ज्ञानेश्वर महाराज इंगले की सुमधुर वाणी में काले का कीर्तन व उसके बाद महाप्रसाद से शिविर का समापन किया जायेगा.
भक्ति के नियम और सहभाग
शिविर में विद्यार्थियों के लिए कडे नियम है. तुलसी की माला और तिलक लगाकर वारकरी विद्यार्थी ज्ञानार्जन कर रहे है. इस शिविर के लिए स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज सहित अनेक ज्येष्ठ संतों का आशीर्वाद रहा है. श्री दास ज्ञानेश्वर अध्यात्म ज्ञानपीठ के सभी पदाधिकारी, सेवाधारी और तीर्थक्षेत्र सोनारखेड के ग्रामवासी इस शिविर की सफलता के लिए परिश्रम कर रहे हैं. इस आध्यात्मिक महोत्सव का लाभ अधिक से अधिक भक्त ले, ऐसा आवाहन संस्था की ओर से किया गया है.





