800 लोग आयकर विभाग की जांच के घेरे में
3 हजार करोड की आमदनी और संपत्ति छिपाने का संशय

* आय और संपत्ति छिपाने का मामला
* विदर्भ के कारोबार जगत में खलबली
* मराठवाडा तक फैला है नागपुर संभाग
नागपुर /दि.5- नागपुर संभाग में आयकर विभाग आईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 800 लोगों को नोटिस जारी किए हैं. इन पर 3 हजार करोड़ से अधिक की आय और संपत्ति छिपाने का आरोप है. विभाग की जांच में सामने आया है कि कई लोगों ने अपनी वास्तविक आय की तुलना में बहुत कम आय घोषित की है. जिससे समस्त विदर्भ में कारोबार जगत में खलबली मची है. उद्यमी और कारोबारी टैक्स सलाहकारों की देहरी चढे हैं. वहां खातों को खंगालकर रिकॉर्ड सुधार का प्रयास हो रहा है. खबर का दावा है कि, पश्चिम विदर्भ अर्थात अमरावती संभाग और मराठवाडा तक अनेक कारोबारियों को आईटी नोटिस जारी हुए है. बता दें कि, गत 1 अप्रैल से नया आयकर कानून लागू हुआ है. उससे पहले पुराने रिजिम के सभी प्रकरणों की अब आयकर विभाग बारीकी से पडताल कर रहा है. सूत्रों का दावा है कि, ऑनलाइन व्यवहार आईटी की रडार पर है. इसी में हुए बडे व्यवहारों के कारण 800-1000 नोटिसेस जारी होने का पक्का समाचार है.
जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां किसी व्यक्ति ने अपनी सालाना आय 10 लाख बताई, लेकिन उसके बैंक खातों में 100 करोड़ तक के लेन-देन पाए गए. इतना ही नहीं, कई लोगों ने बैंक डिपॉजिट, संपत्ति खरीद-बिक्री और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी में किए गए निवेश को भी अपने रिटर्न में शामिल नहीं किया. आयकर विभाग ने ‘स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन्स’ के जरिए इन मामलों का खुलासा किया. यह एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी बैंकों, रजिस्ट्रार ऑफिस और अन्य संस्थाओं द्वारा विभाग को दी जाती है.
जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश लेन-देन नकद में नहीं, बल्कि बैंकिंग चैनल के जरिए हुए थे, लेकिन फिर भी उन्हें आयकर रिटर्न में दिखाया नहीं गया. कुछ मामलों में व्यापार से हुई आय 1 हजार करोड़ तक थी, जिसे पूरी तरह छिपाया गया. इसके अलावा, करीब 850 करोड़ के बैंक डिपॉजिट और 500 करोड़ की निकासी का भी पता चला, जिन्हें रिटर्न में शामिल नहीं किया गया. कई लोगों ने 100 करोड़ तक की फिक्स्ड डिपॉजिट, 15 करोड़ के लग्जरी वाहन और 20 करोड़ की क्रिप्टो संपत्ति तक छिपाई. अधिकारियों के अनुसार, अघोषित रियल एस्टेट संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 250 करोड़ आंकी गई है. अब आयकर विभाग इन सभी मामलों में आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जा सकती है.





