नीट एक्जाम पेपर लीक मामला, पूरे महाराष्ट्र पर आंच

क्या अमरावती पहुंचेगी सीबीआई जांच की आंच!

* नाशिक, पुणे, लातूर से गिरफ्तारियां, अब आगे कौन ?
* गेस पेपर देने की यहां भी परिपाटी ?
* रैकिंग के विद्यार्थियों को अलग से कोचिंग सहित अनेक प्रकार की चर्चाएं
अमरावती/दि.18 – मेडिकल और डेंटल प्रवेश की परीक्षा नीट के पर्चे लीक होने से देशभर की तरह अमरावती के भी 4-5 हजार विद्यार्थियों को भी दोबारा एक्जाम देने का तनाव झेलना पड रहा है. कुछ लोगों की आर्थिक लोभ और लालच का परिणाम वे भुगत रहे हैं. उनके छुटिटयों के सारे प्लॉन चौपट हो गये हैं. अभिभावक भी चिंता से घिर गये हैं. देश की सबसे बडी जांच एजेंसी सीबीआई इस भयंकर प्रकरण की तह में जाने की कोशिश कर रही है. पुणे के बाद आज लातूर से एक बडी मछली सीबीआई ने दबोची है. ऐसे में सीबीआई जांच की आंच अमरावती तक पहुंचने की आशंका बताई जा रही है. यहां के भी कोचिंग संस्थानों का लातूर और अन्य भागों की कोचिंग संस्थान से सीधा जुडाव रहा है. चर्चा है कि अमरावती में भी गेस पेपर देने की परंपरा रही है. बल्कि इसी गेस पेपर में पर्चे लीक की थोडी बहुत कहानी छिपी है.
* क्या होता है गेस पेपर
नीट अर्थात डॉक्टरी पेशे की ओर कदम बढाते विद्यार्थियों को सबसे पहले टारगेट सेट करना होता है. इसके लिए वे कोचिंग क्लास की तलाश में रहते हैं. हाल के वर्षो में अमरावती, अकोला में नीट कोचिंग संस्थान पुणे, कोटा, नागपुर, जैसे शहरों समान बढे हैं. यह संस्थान विद्यार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए गेस पेपर का भी सहारा लेते हैं. संस्थान के गेस पेपर सर्वाधिक मात्रा में सटिक रहने का दावा किया जाता है. जिससे अभिभावक भी पाल्य के अच्छे स्कोर की खातिर संस्थान का चुनाव करते हैं. लाखों की फीस देने तैयार हो जाते हैं.
* डेढ से तीन लाख फीस
एक- एक छात्र की कोर्स की फीस डेढ से तीन लाख वसूली जाती है. बेशक इसमें बडी स्पर्धा बनी हुई है. अधिकाधिक विद्यार्थियों को अपनी ओर खींचने के प्रयास कोचिंग संस्थान करते हैं. इस कडी स्पर्धा में उन्हें गेस पेपर वाली प्रणाली बडी उपयोगी लगती है. इसका असर भी होता है. विद्यार्थी गेस पेपर के चक्कर में कोचिंग संस्थान में लाखों की फीस देकर प्रवेश लेते हैं. कोचिंग संस्थानों का महाविद्यालयों से अघोषित टाय-अप होता है. जिससे कॉलेज अटेंड करे बगैर उनकी उपस्थिति भी दर्शा दी जाती है. कक्षा 12 वीं के एक्झाम की तैयारी करते हुए कोचिंग के माध्यम से नीट की तैयारी होती है.
* एक दर्जन से अधिक संस्थान
अमरावती शहर-जिले में कोचिंग की बात करें, तो नीट और जेईई के एक दर्जन से अधिक अग्रणी क्लासेस बताए जाते हैं. जहां विद्यार्थियों को आकर्षित करने नाना प्रकार के फंडे अपनाएं जाते हैैं. अमरावती में मोटे तौर पर 4700 विद्यार्थियों ने नीट के लिए पंजीयन किया था. चार हजार विद्यार्थियों की 3 लाख की फीस का निर्धारण करें, तो आंकडां करोडों में हो जाता है, अर्थात करोडों का यह कोचिंग व्यवसाय हो चला है.
* गेस पेपर की अंदर की कहानी
कोचिंग संस्थानों के फ्रेंचाईजी भी होते है. उसी प्रकार संस्थान के आपस में दूसरे शहरों में भी लेन-देन होने की चर्चा इस क्षेत्र में सुनने मिली. यहीं से पेपर लीक की कहानी शुरु होती है. सीबीआई जांच में अब तक हुए खुलासे के अनुसार 10 लाख का पर्चा खरीदकर 15 लाख और आगे 25 लाख में बेचा गया. ऐसे में पर्चे के कुछ सवाल भी खरीदें जाते हैं. वे सवाल संबंधित कोचिंग संस्थान अपने गेस पेपर में देते हैं. विद्यार्थियों को दिए गए गेस पेपर के सवाल हकीकत नीट में उतरने पर संस्थान के विद्यार्थियों का न केवल स्कोर बढता है, बल्कि व्याप्त चर्चा और कयासों के अनुसार अगले वर्ष और अधिक विद्यार्थी उस कोचिंग क्लास की ओर आकर्षित होते हैं. ऐसा खेल हर वर्ष चल रहा है. अब देखनेवाली बात होगी कि, सीबीआई की जांच का दायरा लातूर से आगे बढकर अमरावती और आसपास के नगरो-शहरों तक पहुंचता है क्या? नाना प्रकार की आशंकाएं और चर्चाएं चल रही है.

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