45 डिग्री तापमान में हाईड्रामा, न छांव, न पेयजल

चार घंटे पीएम के लिए करना पडा इंतजार

* सीएस ने कहा, डॉ. राठोड की बिगड गई थी तबियत
* समाजसेवकों सहित सैकडों रिश्तेदारों ने घेरा आरएमओ को
* मरने के बाद भी जिला अस्पताल में होता खिलवाड
अमरावती/दि.21 – घोर कलियुग आ गया है. मनुष्य को मरने के बाद भी चैन नहीं दिया जा रहा. जिला सामान्य अस्पताल के मर्च्युरी में 10-11 बॉडीज आज सुबह 8 से 12 बजे तक पोस्टमार्टम के इंतजार में पडी रही. आखिर रिश्तेदारों और समाजसेवियों का पारा चढा. उन्होंने आरएमओ डॉ. नरवणे का घेराव किया. उनके कार्यालय को कुलूपबंदी की चेतावनी दी, तब जाकर 10 मिनट में फोनाफानी कर दो चिकित्सकों को तलब किया गया. दोपहर 1 बजे के बाद शव परीक्षण का कार्य आरंभ हो सका.
इस बीच सीएस डॉ. विनोद पवार ने बताया कि, आज पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी डॉ. राठोड पर थी. उन्हें सबेरे 8 बजे पहुंच जाना चाहिए था, किंतु समय पर तबियत नासाज हो जाने से वे नहीं पहुंच पाए. डॉ. पवार ने दावा किया कि, दूसरे दो चिकित्सकों को ऐन समय पर बुलाकर पोस्टमार्टम शुरु कर दिया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि, 9-10 पार्थिव मर्च्युरी में रखे गए थे.
उल्लेखनीय है कि, हादसा, आत्महत्या, मर्डर और अकस्मात घटनाओं के शिकार लोगों का पीएम आवश्यक होता है. ऐसे में दुर्घटना में मृत व्यक्ति का पार्थिव जिला अस्पताल के शवागार में लाया गया था. वहां अन्य 8-10 पार्थिव भी पोस्टमार्टम के लिए रखे गए थे. सबेरे 8 बजे से रिश्तेदार चिकित्सकों की राह ताक रहे थे. दोपहर 12 बज गए, किंतु कोई डॉक्टर पार्थिव के पीएम हेतु नहीं पहुंचा था. जिससे वहां इंतजार कर रहे रिश्तेदार आगबबूला हो गए. जिला अस्पताल के शवागार के पास छांव नहीं है. पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है. ऐसे में 42-45 डिग्री पारे को सहते हुए रिश्तेदार पीएम के लिए डॉक्टर्स का इंतजार कर रहे थे. चार घंटे बीतने पर भी डॉक्टर्स नहीं आए, तो उनका सब्र जवाब दे गया.
रिश्तेदारों ने समाजसेवियों को फोन किए. सैयद नसीम, रहीम राही और अन्य ने रिश्तेदारों के साथ मिलकर डॉ. नरवणे से जवाब जानना चाहा. डॉ. नरवणे ने कहा कि, 10 मिनट में पीएम के लिए डॉक्टर्स आ जाएंगे. फिर भी काफी देर तक डॉक्टर्स नहीं पहुंचे, तो गुस्साए रिश्तेदारों ने आरएमओ नरवणे का घेराव किया. उन्हें ताले में बंद करने की चेतावनी कथित रुप से दी गई. फलस्वरुप जिला अस्पताल में वातावरण गरमा गया. आनन-फानन में शल्य चिकित्सक डॉ. पवार को सूचना जाते ही उन्होंने अन्य डॉक्टर्स को मर्च्युरी भेजा. दोपहर एक बजे के लगभग पीएम का काम शुरु हुआ. बताया जाता है कि, तेज धूप के कारण मर्च्युरी के पास कोई व्यवस्था नहीं होने से भी मृतकों के रिश्तेदार तुनक गए थे.

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