आरओ प्लांट अनुमति प्रकरण गरमाया
मनपा स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप, विभागीय जांच की मांग

* पर्यावरण कार्यकर्ता गणेश अनासाने की जिलाधीश के पास शिकायत
* संबंधित चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने का अनुरोध
अमरावती/दि.21 – अमरावती महानगरपालिका क्षेत्र में आरओ वॉटर प्लांटों को कथित रूप से अवैध अनुमति देने के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है. इस प्रकरण में मनपा के स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. वसुंधरा फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं पर्यावरण कार्यकर्ता गणेश अनासाने ने जिलाधिकारी कार्यालय में विस्तृत शिकायत दर्ज कर संबंधित चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन और आपराधिक कार्रवाई की मांग की है.
शिकायत के अनुसार, आरओ प्लांट को अनुमति देने का अधिकार केंद्रीय भूजल प्राधिकरण, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल तथा जिलाधिकारी प्रशासन के पास है. इसके बावजूद अमरावती मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना वैधानिक अधिकार के कुछ आरओ प्लांटों को अनुमति दिए जाने का आरोप लगाया गया है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में पानी के नमूनों की केवल एक बार जांच कर पूरे वर्ष के लिए प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने की आशंका पैदा हुई है. साथ ही भूजल के अत्यधिक दोहन, आरओ रिजेक्ट वॉटर के गलत निपटान, दूषित पानी के खतरे और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए गए हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है. निवासी उपजिलाधिकारी कार्यालय ने मनपा आयुक्त और भूजल सर्वेक्षण विभाग को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद उपविभागीय अधिकारी कार्यालय की ओर से तहसीलदारों को अवैध भूजल दोहन के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं. संबंधित पत्र में महाराष्ट्र भूजल (विकास एवं व्यवस्थापन) अधिनियम 2009 के तहत जांच, कार्रवाई और आवश्यकता पड़ने पर बिजली आपूर्ति काटने के अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है. इससे स्पष्ट है कि चिकित्सा अधिकारियों की सुनवाई से पहले ही राजस्व प्रशासन ने आरओ प्लांट और भूजल दोहन संबंधी जांच शुरू कर दी है.
इसी बीच 18 मई को निवासी उपजिलाधिकारी ने एक और पत्र जारी कर मनपा के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत पर विभागीय जांच, निलंबन और कार्रवाई के संबंध में सुनवाई किए जाने की जानकारी दी है. संबंधित अधिकारियों को 21 मई को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं. पूरे मामले ने अमरावती शहर में भूजल दोहन, आरओ प्लांट नियंत्रण, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारों के उपयोग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है, इस पर नागरिकों की नजर टिकी हुई है.





