अमरावती निकाय क्षेत्र में 60 साल के विधान परिषद चुनाव का रोचक रहा है इतिहास

42 वर्ष कांग्रेस का रहा दबदबा, 24 वर्षों से भाजपा का वर्चस्व

* कांग्रेस ने सन 54 से लगातार 7 बार जीता था चुनाव
* सन 72 तक रामदयाल गुप्ता ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी
* सन 72 में एम. यू. देशमुख व सन 78 में ए. के. देशमुख बने थे विधायक
* सन 84 से लगातार दो बार वसूधा देशमुख हुई थी विजयी
* सन 2000 से अब तक 4 बार भाजपा रही विजयी
* भाजपा के जगदीश गुप्ता व प्रवीण पोटे दो-दो बार जीते
* इस बार के चुनाव पर अब सभी की टिकी निगाहे
अमरावती/दि.23- इस समय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की सीट हेतु होने जा रहे चुनाव के चलते अमरावती जिले में जबरदस्त राजनीतिक गहमा-गहमी वाली स्थिति हैं. तथा जिले के 15 निकायों में मौजूदा पक्षीय बलाबल को देखते हुए इस बार मुकाबला काफी हद तक काटे की टक्करवाला माना जा रहा है. जिसके चलते 18 जून को होनेवाले चुनाव एवं 22 जून को होनेवाली मतगणना के बाद घोषित होेनेवाले चुनावी नतीजो को लेकर अभी से ही जबरदस्त उत्सुकता देखी जा रही हैं. जिसके चलते यह जानना भी दिलचस्प हो सकता है कि अमरावती निकाय क्षेत्र से अब तक विधान परिषद की सीट के लिए कितने बार चुनाव हुए तथा अब तक कौन-कौनसी सीट से निर्वाचित होकर विधान परिषद में पहुंचा.
अमरावती निकाय क्षेत्र से विधान परिषद की सीट हेतु अब तक हुए चुनावों की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सन 1972 से पहले स्थानीय सरोज चौक परिसर निवासी रामदयाल गुप्ता द्बारा अमरावती सीट का विधान परिषद में तीन बार प्रतिनिधित्व किया गया था. ऐसे में यदि विधान परिषद के 6-6 वर्ष के कार्यकाल ग्राह्य माना जाए तो रामदयाल गुप्ता सन 1954 से 1972 तक लगतार 18 वर्ष विधान परिषद के सदस्य रहे. खास बात यह भी रही कि रामदयाल गुप्ता की गिनती कांग्रेस के तत्कालीन बडे नेताओं में हुआ करती थी. जिन्होंने विधान परिषद में कांग्रेस की ओर से अमरावती सीट का प्रतिनिधित्व किया था.
वहीं सन 1972 में हुआ चुनाव दर्यापुर निवासी एन. यू. देशमुख तथा सन 1978 में हुआ चुनाव दत्तापुर (धामणगांव) निवासी ए. के. उर्फ अण्णासाहेब देशमुख ने जीता था. ये दोनों ही कांग्रेस की ओर से निकाय निर्वाचन क्षेत्र की सीट हेतु विधान परिषद के लिए प्रत्याशी थे. वर्ष 1984 में विधान परिषद का चुुनाव होने से पूर्व ए. के. उर्फ अण्णासाहेब देशमुख का निधन हो गया था, जिसके चलते कांग्रेस ने अपनी महिला नेत्री वसुधा देशमुख को चुनावी मैदान में उतारा था. जिन्होंने सन 1984 का चुनाव जितने के साथ-साथ वर्ष 1990 के चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर निकाय क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव जीता था और वे लगातार 12 वर्षों तक इस सीट का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व करती रही. वसुधा देशमुख का दूसरा कार्यकाल वर्ष 1996 में खत्म हो गया था. परंतु इसके उपरांत अगले करीब 3-4 वर्षों तक तत्कालीन राजनीतिक स्थितियो के चलते महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव नहीं कराए जा सकते थे. जिसके चलते सिधे सन 2000 में अमरावती निकाय क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव हुआ था. जिसमें जीत दर्ज करते हुए पूर्व मंत्री जगदीश गुप्ता ने अमरावती सीट से विधान परिषद में पहली बार भाजपा का खाता खोला था.
ज्ञात रहे कि पूर्व मंत्री जगदिश गुप्ता ने ही सन 1989-90 के विधानसभा चुनाव में अमरावती सीट से जीत हासील करते हुए विधानसभा में भी भाजपा का खाता खोला था और सन 1994-95 के विधानसभा चुनाव में वे लगातार दूसरी बार भाजपा की टिकट पर अमरावती विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे. जिन्हें उस समय राज्य में भाजपा सेना युति की सरकार बनने पर राज्यमंत्री व जिला पालकमंत्री भी बनाया गया है. परंतु वर्ष 1999 के विधानसभा चुनाव में जगदिश गुप्ता को कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. सुनील देशमुख के हाथों हार का सामना करना पडा. जिन्हें भाजपा ने 2000 में हुए अमरावती निकाय क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में प्रत्याशी बनाया था और जगदीश गुप्ता ने उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनवर खान बिल्डर को 12 वोटों से पराजीत करते हुए जीत हासील की थी और वे लगातार तीसरी बार विधान मंडल में पहुंचे थे. जिसके उपरांत वर्ष 2006 में हुए अमरावती निकाय क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर जगदीश गुप्ता को ही प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा था. उस समय गुप्ता की दावेदारी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी मिलींद चिमोटे की दावेदारी थी. लेकिन उस चुनाव में भी जगदीश गुप्ता ने 24 वोटों की लीड के साथ जीत हासील की थी और लगातार दूसरी बार विधान परिषद का चुनाव जीतने के साथ ही जगदीश गुप्ता लगातार चौथी बार विधान मंडल ने विधायक निर्वाचित होकर पहुंचे थे.
इसके उपरांत वर्ष 2012 में हुए विधान परिषद के चुनाव में भाजपा ने प्रवीण पोटे के तौर पर नए चेहरे पर दाव लगाया था. जिनके सामने कांग्रेस की ओर से बबलू देशमुख की दावेदारी रहने के साथ ही मुलत: अमरावती निवासी एवं मुंबई के उद्योजक अजय नावंदर की निर्दलीय दावेदारी की चुनौती दी थी. लेकिन उस वक्त कांग्रेस के लिए बेहद अनुकूल माहौल रहने के बावजूद तब राजनीति में बेहद नए नवेले रहनेवाले भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल ने कांग्रेस के कद्दावर नेता बबलू देशमुख व ‘हैवीवेट’ निर्दलीय प्रत्याशी अजय नावंदर को पराजीत कर जीत हासिल की थी. इसके साथ ही प्रवीण पोटे पाटिल ने अपना पहला कार्यकाल सफलता पूर्वक पूर्ण करने के बाद वर्ष 2018 के विधान परिषद चुनाव में एकतर्फा जीत हासिल करते हुए क्लिन स्वीप किया था और रिकॉर्ड तोड वोटों के साथ निकाय क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव जीतने का इतिहास रचा था उस चुनाव में कांग्रेस के पास अपने खुद के 117 वोट थे. जिसमें से कांग्रेस प्रत्याशी अनिल माधोगडिया को केवल 17 वोट ही मिले थे. जबकि प्रवीण पोटे ने रिकॉर्ड 472 वोट हासील करते हुए चुनाव जीता था. खास बात यह भी थी कि वर्ष 2012 में जब प्रवीण पोटे पहलीबार विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए थे तब महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा आघाडी की सरकार हुआ करती थी. लेकिन 2 वर्ष बाद ही राज्य में सत्ता परिवर्तन होकर भाजपा के नेतृत्वतले भाजपा सेना युति की सरकार बनी थी. जिसमें विधायक प्रवीण पोटे पाटिल को राज्यमंत्री व जिला पालकमंत्री का पद मिला था. जिसके उपरांत वर्ष 2018 में प्रवीण पोटे पाटिल ने एक बार फिर विधान परिषद का चुनाव जीता था.
ऐसे में कहा जा सकता है कि विगत करीब 60 वर्षों के दौरान अमरावती निकाय क्षेत्र में विधान परिषद की सीट पर लगातार 42 वर्षों तक कांग्रेस का दबदबा रहा, वहीं विगत 24 वर्षों से यह सीट भाजपा के कब्जे में हैं. साथ ही यह भी कहा जा सकता है कि सन 1972 के बाद से लेकर अब तक अमरावती निकाय क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला लगभग बराबरी वाला रहा, क्योंकि सन 1972 से लेकर अब तक 8 बार हुए विधान परिषद चुनाव में पहले कांग्रेस ने चार बार और फिर भाजपा ने चार बार जीत हासील की. इसके चलते अब इस बात को लेकर जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है कि इस बार कौन किस पर भारी पडता है. विशेष उल्लेखनीय है कि पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल का विधान परिषद सदस्य के तौर पर कार्यकाल वर्ष 2024 में ही समाप्त हो गया था. लेकिन चूंकि उस समय जिले के सभी स्थानीय स्वायत्त निकायों में कोविड संक्रमण काल व ओबीसी आरक्षण के चलते चुनाव नहीं कराए जा सके थे और सभी निकायों में प्रशासक राज चल रहा था. जिसके चलते अमरावती निकाय निर्वाचन क्षेत्र विधान परिषद की सीट के लिए चुनाव का मामला भी अधर में लटका हुआ था और अब दो वर्ष के अंतराल पश्चात अमरावती जिप व जिले की 14 पंस को छोडकर अमरावती मनपा सहित जिले की 10 नगर परिषदों व दो नगर पंचायतों में चुनाव निपट जाने के साथ ही निकाय निर्वाचन क्षेत्र में कुल मतदाता संख्या में 75 फीसद से अधिक मतदाता संख्या रहने एवं 75 फीसद से अधिक स्थानीय निकायों के सक्रिय व कार्यरत रहने के चलते विधान परिषद के लिए चुनाव कराए जा रहे हैं.
* उपरी सदन व स्थायी सभागृह है विधान परिषद
बता दें कि महाराष्ट्र विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 78 हैं. जिसमें से 22 सदस्य स्थानीय निकायों द्बारा निर्वाचित होते हैं. वहीं 30 सदस्य विधानसभा सदस्यों, 7 सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों व 7 सदस्य शिक्षण निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित होते हैं. इसके अलावा 12 सदस्य राज्यपाल द्बारा मनोनित किए जाते हैं. राज्य विधानमंत्री के उपरी सदन रहनेवाले विधान परिषद को स्थायी सदन भी कहा जाता हैं. क्योंकि इसके एक तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते है. जिनके स्थान पर नए सदस्यों का निर्वाचन होता हैं और यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है.
* सन 1937 में हुई थी स्थापना
यहा यह विशेष उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधान परिषद की स्थापना 20 जुलाई 1937 को भारत सरकार अधीनीयम 1935 के तहत हुई थी. तथा विधान परिषद की पहली बैठक और पहला सत्र 20 जुलाई 1937 को पुणे के काउन्सिल हॉल में आयोजित किया गया था. वहीं राज्य के तौर पर महाराष्ट्र का गठन होने के उपरांत वर्ष 1960 में विधान परिषद को पुर्नस्थापित किया गया था.
* विगत 60 वर्षों के दौरान ऐसी रही स्थिति
वर्ष विजेता प्रत्याशी/पार्टी प्रमुख प्रतिद्बंदी
सन 54 से 72 तक रामदयाल गुप्ता (लगातार तीन बार निर्वाचित)/कांग्रेस —
सन 1972 एम. यू. देशमुख (दर्यापुर)/कांग्रेस —
सन 1978 ए. के. उर्फ अण्णासाहब देशमुख (धामणगांव)/कांग्रेस —
सन 1984 वसुधा देशमुख/कांग्रेस —
सन 1990 वसुधा देशमुख/कांग्रेस —
सन 2000 जगदीश गुप्ता/भाजपा अनवर खान बिल्डर/कांग्रेस
सन 2006 जगदीश गुप्ता/भाजपा मिलींद चिमोटे/कांग्रेस
सन 2012 प्रवीण पोटे/भाजपा बबलू देशमुख/कांग्रेस व अजय नावंदर (निर्दलीय)
सन 2018 प्रवीण पोटे/भाजपा अनिल माधोगडिया/कांग्रेस

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