हमने उनको नहीं, उन्होंने हमे धोखा दिया था

उध्दव ठाकरे के आरोप पर बच्चू कडू का पलटवार

* कहा – कैबिनेट का वादा कर दिया था राज्यमंत्री पद
* हमारे समर्थन से उध्दव ठाकरे बने थे मुख्यमंत्री
* अपनी पार्टी को नहीं संभाल पाए उध्दव ठाकरे
* अब शिवसेना के टूटने का ठीकरा दूसरों पर फोड रहे
मुंबई /दि.23- महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता तथा विधान परिषद सदस्य बच्चू कडू ने शिवसेना (उबाठा) के पार्टी प्रमुख उध्दव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं. बच्चू कडू ने दावा किया कि महाविकास आघाड़ी सरकार के गठन के समय उद्धव ठाकरे ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने का वादा किया था, लेकिन बाद में उन्हें केवल राज्यमंत्री पद देकर फंसाया गया था और आज वही उध्दव ठाकरे उन पर धोखा देने का आरोप लगा रहे है. साथ ही बच्चू कडू ने यह भी कहा कि उध्दव ठाकरे अपनी पार्टी व अपनी सरकार को बचा पाने में पूरी तरह से नाकाम रही और अब शिवसेना में हुई टूट का पूरा दोष दूसरों पर मढ रहे हैैं, जो कि पूरी तरह से गलत है.
दरअसल, शुक्रवार को प्रहार संगठन के सोलापुर, परभणी और धाराशिव जिलों के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना (ठाकरे गुट) में प्रवेश किया. ‘मातोश्री’ में आयोजित इस प्रवेश कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे ने बच्चू कडू पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए कहा था, जो व्यक्ति गया, वह पुराना शिवसैनिक ही था. उसे घर बुलाकर मंत्री बनाना मेरी गलती थी. जो लोग लोभ में चले गए, उन्हें जाने दीजिए, लेकिन कार्यकर्ता आज भी मेरे साथ हैं, यह खुशी की बात है.
उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद बच्चू कडू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकार की टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा, पहले यह बताइए कि जब आप मुख्यमंत्री बने, तब बच्चू कडू को केवल राज्यमंत्री क्यों बनाया गया? उस समय मेरे साथ दो विधायक थे और हम शिवसेना के विरोध में चुनाव जीतकर आए थे. चुनाव के बाद हमें कई दलों से प्रस्ताव मिले थे, लेकिन एकनाथ शिंदे ने पहल करते हुए हमारी मुलाकात उद्धव ठाकरे से करवाई. हमें लगा कि उद्धव ठाकरे को समर्थन देना चाहिए, इसलिए हम उनके साथ खड़े हुए.
इसके साथ ही पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने दावा किया कि 2019 में महाविकास आघाड़ी सरकार के गठन के दौरान सात निर्दलीय विधायक उद्धव ठाकरे के समर्थन में मजबूती से खड़े थे. उन्होंने कहा, हम खुद उनके घर जाकर समर्थन देकर आए थे. अगर उस समय हम समर्थन नहीं देते, तो राजनीतिक तस्वीर अलग हो सकती थी. हमारे मतों की वजह से ही उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन पाए. इसलिए यह कहना कि उन्होंने हमें मंत्री बनाया, पूरी तरह सही नहीं है. बच्चू कडू ने आगे आरोप लगाया कि उस समय उद्धव ठाकरे ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में उनके स्थान पर शंकरराव गडाख को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया. उन्होंने कहा, मुझे दिव्यांग कल्याण विभाग दिए जाने की भी बात थी, लेकिन वह विभाग भी मुझे नहीं मिला. संख्याबल बढ़ाने के लिए हमें साथ लिया गया और बाद में वादे पूरे नहीं किए गए.
शिवसेना में हुई बगावत और पार्टी विभाजन के मुद्दे पर भी बच्चू कडू ने सफाई देते हुए कहा कि पूरा दोष उनके सिर पर डालना उचित नहीं है. उन्होंने कहा, गुवाहाटी जाने से पहले भी मैंने उद्धव ठाकरे से चर्चा की थी. इसलिए शिवसेना टूटने का ठीकरा मेरे सिर पर न फोड़ा जाए. उद्धव ठाकरे मेरे बारे में जो कुछ बोल रहे हैं, वह दिल से कहा गया हो, ऐसा मुझे नहीं लगता. हमारे मन में आज भी उनके प्रति सम्मान है, लेकिन उन्होंने यह विषय उठाया, इसलिए मुझे जवाब देना पड़ा.
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बच्चू कडू और उद्धव ठाकरे के बीच बढ़ती तल्खी आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में महाविकास आघाड़ी तथा शिंदे गुट दोनों के लिए राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. उल्लेखनीय है कि हाल ही में बच्चू कडू ने अपनी प्रहार संगठन को शिवसेना शिंदे गुट में विलीन किया है और उन्हें शिवसेना की ओर से विधान परिषद भेजा गया है. दूसरी ओर, उनके कुछ पुराने पदाधिकारी ठाकरे गुट में शामिल हो गए हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तीखा हो गया है.

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