अमरावती में सरकारी गाड़ियों पर हर महीने लाखों का खर्च

इलेक्ट्रीक वाहन अपनाने की रफ्तार धीमी

अमरावती/दि.27- अमरावती जिले में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन खर्च को लेकर सरकारी वाहन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. जिले में 500 से अधिक सरकारी और अर्ध-सरकारी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिन पर हर महीने लाखों रुपये का ईंधन और रखरखाव खर्च हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील के बावजूद जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का उपयोग बेहद सीमित है. अधिकांश विभाग अब भी पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भर हैं.
जानकारी के अनुसार जिले में सबसे ज्यादा वाहन पुलिस विभाग के पास हैं. करीब 200 वाहन कानून-व्यवस्था, 24 घंटे गश्त और तखझ सुरक्षा में लगाए जाते हैं. इसी कारण पुलिस विभाग का ईंधन और रखरखाव खर्च सबसे अधिक बताया जा रहा है. सरकारी खरीद प्रक्रिया में रोक और देरी के कारण कई विभाग निजी ठेकेदारों से टैक्सी कोटे के तहत वाहन किराए पर ले रहे हैं. अनुमान है कि लगभग 35 प्रतिशत वाहन लीज़ पर संचालित किए जा रहे हैं. इससे प्रशासन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ रहा है. ईंधन के अलावा टायर, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स और पुरानी गाड़ियों की मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं. कई पुराने वाहन कबाड़ जैसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, फिर भी उनका उपयोग सीमित सरकारी कार्यों में किया जा रहा है.

* ईवी अपनाने में क्या दिक्कत?
सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बेहद कम है. इसके पीछे प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं. पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन का अभाव, सरकारी खरीद प्रक्रिया में देरी, पारंपरिक वाहनों पर अधिकारियों की निर्भरता, ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रीक वाहनों के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी आदि कारण है.

* प्रशासन के लिए सुझाए गए उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार प्रशासन कुछ कदम उठाकर ईंधन खर्च में बड़ी बचत कर सकता है, कार पूलिंग लागू करना, एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारियों के लिए साझा वाहन व्यवस्था, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बढ़ाना, अनावश्यक वाहन उपयोग रोकना, धीरे-धीरे एत वाहनों की संख्या बढ़ाना. अधिकारियों का मानना है कि यदि कार पूलिंग और ऑनलाइन बैठकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो करीब 25 प्रतिशत तक ईंधन बचत संभव है.

Back to top button