ओबीसी आरक्षण को धक्का पहुँचाने पर सामना हमसे होगा

लक्ष्मण हाके का मनोज जरांगे पाटिल पर हमला

पुणे/दि.28 – ओबीसी आरक्षण को धक्का पहुँचाने पर सामना हमसे होगा, ऐसी स्पष्ट चेतावनी ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके ने दिया है. मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन पर टीका करते हुए हाके ने इस आंदोलन को लोकतंत्र और आरक्षण का अज्ञान बताया है. पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जरांगे पाटिल की मांगें कानून की कसौटी पर नहीं टिकेंगी. हाके ने कहा कि, मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन यानी लोकतंत्र और आरक्षण का कौड़ी भर भी ज्ञान न रखने वाले व्यक्ति के हाथ में गया बच्चों का खेल है. सरकार ने उनके लिए हमेशा ’रेड कार्पेट’ बिछाया है और उनके दबाव में आकर निकाला गया सरकारी नोटिफिकेशन पूरी तरह से अवैध है.
जरांगे पाटिल के नौवें अनशन पर बोलते हुए हाके ने उन्हें व्यंग्यात्मक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा, इससे पहले 8 बार अनशन हुआ है, अब यह नौवां अनशन शुरू है. पांच पीढ़ियों का नुकसान होने का दावा जरांगे कर रहे हैं, लेकिन फिर इससे फायदा आखिरकार किसका हुआ? मूल रूप से मराठा समाज की गरीबी के लिए ओबीसी आरक्षण कैसे जिम्मेदार हो सकता है? उन्होंने जरांगे पाटिल को बजट में ओबीसी के लिए कितना फंड आता है, इसका आत्मपरीक्षण करने को कहा. नेताओं और सहकार महर्षियों ने ही संपत्ति का केंद्रीकरण कर मराठा समाज को धोखा दिया है, यह आरोप भी उन्होंने लगाया.
सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए हाके ने कहा कि, सरकार ने जरांगे के अनुचित लाड़-प्यार पूरे किए हैं. मुख्यमंत्री और मंत्री केवल उन्हीं से मिलने जाते हैं, लेकिन उन्हें ओबीसी समाज का दुख और भूमिका क्यों नहीं समझ आती? सरकार कोई भी मानदंड लगाए बिना अवैध रूप से प्रमाणपत्र बांट रही है और सभी कुनबी प्रमाणपत्र नकली हैं, ऐसा दावा उन्होंने किया. इस आंदोलन के कारण ओबीसी का बहुत नुकसान हुआ है और हमारा अस्तित्व ही खतरे में है, ऐसी चिंता उन्होंने व्यक्त की.
हाके ने कहा कि, अब अनशन पर नहीं बैठेंगे बल्कि सीधे मैदान में उतरकर लड़ेंगे. उसके लिए राज्यभर में जन-जागृति सभाओं का सिलसिला जारी रहेगा. जरांगे निश्चित रूप से लड़ने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी मांग पूरी तरह से गलत है. उनका ज्ञान कम है, लेकिन इस समय उनकी तबीयत बहुत खराब है. इसलिए उन्होंने अनशन नहीं करना चाहिए, ऐसा आवाहन हाके ने किया. जरांगे दादा, आपने जरूरतमंदों की लड़ाई खड़ी की है, लेकिन उसका फायदा आखिरकार किसने लिया इसका विचार करें. अपना मन बड़ा करें और सभी समाज के प्रश्नों पर एक साथ आएं, हम आपके साथ खड़े रहने के लिए तैयार हैं, ऐसा आवाहन भी अंत में हाके ने किया.

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