बाजोरिया के नामांकन पत्र से शिवसेना के दोनों धडों में हडकंप
दोनों शिवसेना के 8 नगरसेवकों ने नामांकन पर सूचक के रूप में किये है हस्ताक्षर

* अंजनगांव सूर्जी के 10 नगरसेवक बने हैं बाजोरिया के सूचक
* सूचकों में शिंदे सेना के 3 व सेना उबाठा के 5 नगरसेवकों का समावेश
* सपा को दो नगरसेवकों ने भी सूचक के तौर पर की है दस्तखत
* चुनावी मुहाने पर ही मविआ और महायुति के वोटों में दिखी फूट
अमरावती/दि.2 – विधान परिषद चुनाव के लिए अमरावती स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. शिंदे गुट की शिवसेना से जुड़े रहे बाजोरिया की इस अप्रत्याशित दावेदारी ने न केवल महायुति बल्कि महाविकास आघाड़ी के खेमे में भी बेचैनी बढ़ा दी है. क्योंकि विप्लव बाजोरिया के नामांकन पत्र पर जिन 10 नगरसेवकों ने हस्ताक्षर किये है, उनमें शिंदे सेना के तीन व शिवसेना उबाठा के पांच नगरसेवकों का समावेश है. जिसके चलते बाजोरिया के नामांकन पत्र पर सूचक के रूप में हस्ताक्षर करनेवाले नगरसेवकों की इस समय सबसे अधिक चर्चा हो रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.
* शिंदे सेना से निष्कासन की चर्चा ने पकड़ा जोर
बता दे कि विप्लव बाजोरिया लंबे समय से शिंदे गुट की शिवसेना से जुड़े रहे हैं और हिंगोली-परभणी क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं. हालांकि इस बार उन्हें पार्टी की ओर से अवसर नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने अमरावती सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया. महायुति के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है. यहां तक कि निष्कासन की संभावना भी व्यक्त की जा रही है.
* सूचकों की सूची ने बढ़ाई राजनीतिक बेचैनी
बाजोरिया के नामांकन पत्र पर अंजनगांव सूर्जी नगर परिषद के 10 नगरसेवकों ने सूचक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं. इनमें शिंदे सेना के तीन नगरसेवक, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पांच नगरसेवक तथा समाजवादी पार्टी के दो नगरसेवक शामिल बताए जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल नामांकन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर चल रहे असंतोष और गुटबाजी का संकेत भी माना जा सकता है. चुनावी मुकाबले से पहले ही विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों द्वारा क्रॉस वोटिंग जैसे संकेत सामने आने से दोनों प्रमुख गठबंधनों की चिंता बढ़ गई है.
* नगरसेवकों के राजनीतिक भविष्य पर मंडराने लगा खतरा
बाजोरिया के समर्थन में हस्ताक्षर करने वाले नगरसेवकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकती दिखाई दे रही है. खासकर शिंदे सेना और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े नगरसेवकों को लेकर पार्टी स्तर पर नाराजगी की चर्चा है. यदि पार्टी नेतृत्व इसे अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ गतिविधि मानता है, तो संबंधित नगरसेवकों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि स्थानीय निकायों में पहले ही दलगत निष्ठा को लेकर सख्ती बढ़ी है. ऐसे में विरोधी खेमे या निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में खुलकर सामने आना संबंधित जनप्रतिनिधियों के लिए भारी पड़ सकता है.
* समर्थन दिया, लेकिन सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने
नामांकन दाखिल करने के दौरान एक और दिलचस्प पहलू सामने आया. जिन नगरसेवकों ने नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए, उनमें से कोई भी बाजोरिया के साथ जिलाधीश कार्यालय में दिखाई नहीं दिया. सूत्रों के अनुसार अधिकांश समर्थक अपनी राजनीतिक पहचान उजागर होने से बचना चाहते थे. यही कारण रहा कि नामांकन के समय बाजोरिया पिता-पुत्र के साथ केवल उनके कुछ रिश्तेदार और चुनिंदा समर्थक ही मौजूद थे. राजनीतिक हलकों में इसे भी एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि समर्थन तो है, लेकिन खुलकर सामने आने का साहस फिलहाल कोई नहीं दिखा रहा.
* तीन सेट भरने की चर्चा, जमा हुआ केवल एक नामांकन
नामांकन प्रक्रिया से पहले यह चर्चा थी कि विप्लव बाजोरिया एहतियात के तौर पर तीन सेट में नामांकन दाखिल करेंगे. हालांकि अंतिम समय में उन्होंने केवल एक ही सेट प्रस्तुत किया. इससे भी कई तरह की अटकलों को जन्म मिला है. कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे अंतिम समय तक चल रही राजनीतिक बातचीत से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सीमित समर्थन का संकेत मान रहे हैं.
* नई राजनीतिक जमीन की तलाश में बाजोरिया परिवार
विप्लव बाजोरिया के साथ उनके पिता एवं पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया भी अमरावती पहुंचे थे. गोपीकिसन बाजोरिया स्वयं अकोला-वाशिम-बुलढाणा स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं. पिछले चुनाव में पराजय के बाद अब बाजोरिया परिवार अमरावती क्षेत्र में नई राजनीतिक संभावनाएं तलाशता नजर आ रहा है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह दावेदारी केवल वर्तमान चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की राजनीतिक भूमिका तय करने का प्रयास भी हो सकती है.
* उबाठा विधायक ने जताया आश्चर्य
दर्यापुर क्षेत्र के उबाठा विधायक गजानन लवटे ने इस पूरे घटनाक्रम पर आश्चर्य व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि उन्हें नगरसेवकों द्वारा बाजोरिया के नामांकन का समर्थन किए जाने की जानकारी नहीं थी. मामले की जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने भी हैरानी जताई है. इससे यह संकेत मिलते हैं कि संबंधित दलों के स्थानीय नेतृत्व को भी इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी नहीं थी.
* चुनाव से पहले ही दिखी अंदरूनी फूट
अमरावती विधान परिषद चुनाव में महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों ही अपने-अपने गणित को मजबूत बताने में जुटे हैं. लेकिन बाजोरिया के नामांकन ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि दोनों खेमों के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है. विभिन्न दलों के नगरसेवकों का एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में सामने आना चुनावी समीकरणों में नई जटिलता पैदा कर सकता है.
अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि बाजोरिया चुनाव मैदान में अंत तक बने रहते हैं या नहीं, उनके समर्थन में आए नगरसेवकों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं, और यह पूरी कवायद आखिर किस राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. फिलहाल इतना तय है कि एक निर्दलीय नामांकन ने अमरावती विधान परिषद चुनाव को अचानक बेहद रोचक और चर्चित बना दिया है.