45 वर्ष की उम्र तक अंगनवाडी सेविकाओं को पदोन्नति देना अवैध

हाईकोर्ट का निर्णय, 55 वर्ष उम्र का पुराना नियम कायम

नागपुर /दि.2– केवल 45 वर्ष की उम्र तक आंगनवाडी सेविकाओं को पर्यवेक्षिकापद पर पदोन्नति देना पात्र ठहराने वाला नियम मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने अवैध, मनमानी व एकतरफा ठहराकर रद्द कर दिया है. यह नियम सेवा ज्येष्ठता, कानूनी अपेक्षा व समानता तत्व की अवहेलना करता है, ऐसा निर्णय में स्पष्ट किया गया. न्यायमूर्ति अनिल किलोर व राज वाकोडे ने यह निर्णय दिया है.
सभी आंगनवाडी केंद्रों का कामकाज सहजता से चले, इसके लिए ‘बीट’ स्तर पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाती है. एक पर्यवेक्षिका साधारणत: 25 आंगनवाडी केंद्र के काम का व्यवस्थापन और पर्यवेक्षण करती है. आगनवाडी सेविकाओं की निवृत्ति की उम्र 65 वर्ष तथा पर्यवेक्षिका की निवृत्ति की उम्र 58 वर्ष है. 17 नवंबर 2001 को शासन निर्णय द्वारा कक्षा 10 वीं उत्तीर्ण, 10 वर्ष का अनुभव और 55 वर्ष की उम्र की आंगनवाडी सेविकाओं को पदोन्नति के लिए पात्र ठहराया गया था. परंतु महिला व बालकल्याण विभाग ने 4 जून 2021 को अधिसूचना जारी कर नई सेवा प्रवेश नियम लागू किया. जिसके वादग्रस्त नियम 7 (1) (सी) में केवल 45 वर्ष की उम्र तक आंगनवाडी सेविका ही पर्यवेक्षिका पद पर नियुक्ति के प्रस्ताव को घटनाबाह्य बताते हुए रद्द किया. साथ ही इस आधार पर निकाले गये 22 सितंबर 2021 और 19 दिसंबर 2022 के आदेश को अवैध ठहराया. राज्य सरकार ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए कहा कि, 55 वर्ष की आयु में पर्यवेक्षिका के रुप में नियुक्ति होने पर सेवानिवृत्ति तक केवल तीन साल की सेवा शेष रहीत है. साथ ही 25 अंगनवाडी केंद्रों पर देखरेख रखने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम इस आयु में कठीन हो सकता है. न्यायालय ने यह युक्तिवाद खारिज कर दिया. जो अंगनवाडी सेविका 35 साल तक सेवा देने में सक्षम मानी जा सकती है, उन्हीं सेविकाओं को 58 वर्ष तक पर्यवेक्षिका के रुप में काम करने में अनुचित ठहराना उचित नहीं है, ऐसा स्पष्ट निरीक्षण दर्ज करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार की नीति पर निराशा व्यक्त की. अनुभव के कारण जिम्मेदारी पूर्ण करने की क्षमता अधिक सक्षम रहती है. सार्वजनिक नौकरी के नियम यह भेदभाव रहित रहना आवश्यक है. केवल आयु के आधार पर अनुभवी कर्मचारियों को पदोन्नति से दूर रखना यह घटनात्मक समानता के सिद्धांत के साथ असंगत रहने की बात न्यायालय ने दर्ज की.

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