अकोला के वीर सपूत प्रवीण जंजाल को मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’

राष्ट्रपति ने भावुक होकर वीरमाता को लगाया गले

अकोला/नई दिल्ली/दि.9 – कश्मीर घाटी में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अकोला जिले के वीर सपूत प्रवीण प्रभाकर जंजाल को मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च शौर्य सम्मान ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया. नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया. इस दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब अपने बेटे की वीरता और उसकी शहादत को याद कर वीरमाता शालू जंजाल की आंखें भर आईं. राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर उन्हें गले लगाकर सांत्वना दी.
अकोला जिले के मोरगांव भाकरे निवासी प्रवीण प्रभाकर जंजाल महार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन राष्ट्रीय राइफल्स में सिपाही के रूप में कार्यरत थे. 6 जुलाई 2024 को कश्मीर घाटी में चल रहे एक तलाशी अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया था. अभियान के दौरान संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने पर प्रवीण जंजाल ने अपने साथियों को तुरंत सतर्क किया. इसी बीच छिपे हुए आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उन्होंने आतंकवादियों का डटकर मुकाबला किया और सटीक निशाने से दो कुख्यात आतंकवादियों को मार गिराया. मुठभेड़ के दौरान उनके सिर में गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बावजूद उन्होंने अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखा और देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की. उनके इस अद्वितीय शौर्य, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित करने की घोषणा की थी.
राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में शहीद प्रवीण जंजाल की पत्नी श्यामबाला जंजाल और माता शालू जंजाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया. समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी तथा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे. सम्मान ग्रहण करते समय वीरमाता शालू जंजाल अपने पुत्र की शहादत को याद कर भावुक हो गईं. उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. यह दृश्य देखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी भावुक हो उठीं और उन्होंने वीरमाता को गले लगाकर उनका हौसला बढ़ाया. इस भावुक क्षण ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम कर दीं. प्रवीण जंजाल की वीरगाथा आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है. उनका सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र सदैव याद रखेगा.

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