5 वर्ष में 25 बाल कामगारों की मुक्तता
जिले में 58 छापे, 8 के खिलाफ कानूनी कार्रवाई’

अमरावती/दि.12– बाल कामगार निर्मूलन के लिए कामगार विभाग द्बारा लगातार अभियान एवं छापे की कार्रवाई को चलाया जाता है. सन 2021 से 2026 की कालावधि के दौरान 58 छापे मारते हुए 181 आस्थापनाओं की जांच पडताल की गई तथा 25 बाल कामगारों की मुक्तता कराई गई. जिनमें 14 वर्ष से कम आयु वाले 10 बच्चों तथा 14 से 18 वर्ष आयु गुट वाले 15 बच्चों का समावेश रहा.
उल्लेखनीय है कि बचपन को पढने लिखने, खेलने, सपने सजाने तथा उज्वल भविष्य बनाने का समय माना जाता है. लेकिन आज भी कई बच्चे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति, गरीबी एवं सामाजिक दिक्कतों के चलते बाल मजदूरी के मकड जाल में फंसे रहने के लिए मजबूर है. इसी स्थिति के चलते जिन बच्चों ने शाला की कक्षाओं में रहना चाहिए वे होटल, गैरेज, दुकान, कारखाने सहित विविध आस्थापनाओं में काम करते दिखाई देते है. जिसके चलते उनकी पढाई लिखाई, स्वास्थ्य एवं मानसिक विकास पर विपरित परिणाम पडता है. ऐसे बच्चों को उनके अधिकार का बचपन मिले तथा समाज में बाल मजदूरी के खिलाफ जागरूकता निर्माण हो. इस हेतु प्रतिवर्ष 12 जून को विश्व बाल कामगार प्रथा विरोधी दिवस मनाया जाता है. साथ ही पूरे वर्ष भर के दौरान बाल कामगार निर्मूलन अभियान चलाते हुए अल्पवयीन बच्चों से काम कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है. साथ ही साथ बाल कामगारों की मुक्तता भी कराई जाती है. इसी के विगत 5 वर्षो े दौरान अमरावती में 8 आस्थापना धारकों के खिलाफ बाल एवं किशोरवयीन कामगार (प्रतिबंध व नियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत फौजदारी मामले दर्ज करने के साथ ही अदालत में मुकदमें भी दायर किए गये.
* क्या कहता है कानून ?
बाल एवं किशोरवयीन कामगार (प्रतिबंध व नियमन) अधिनियम 1986 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को किसी भी तरह के व्यवसाय अथवा प्रक्रिया में काम पर रखना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. साथ ही 14 से 18 वर्ष आयु गुट वाले किशोरवयीन बच्चों को खतरनाक उद्योग, कारखाने एवं प्रक्रिया में काम पर नहीं रखा जा सकता. ऐसे किसी भी मामले में दोषी पाए जाने पर 6 माह से 2 साल तक कारावास तथा 20 हजार से 50 हजार रूपए के जुर्माने की सजा का प्रावधान है.
* बाल मजदूरी रोकना सामूहिक जिम्मेदारी
बाल मजदूरी के चलते बच्चों की पढाई लिखाई व भविष्य खतरे में आते है. जिसका सीधा परिणाम आगे चलकर अप्रत्यक्ष रूप से समाज पर ही पडता है. ऐसे में बाल मजदूरी को रोकना सरकार एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. जिसके चलते कहीं पर भी बाल कामगार पाए जाने पर इसकी सूचना तुरंत ही प्रशासन अथवा कामगार विभाग को दी जानी चाहिए.





