गणवेश के लिए 300 रूपये किये निर्धारित, दिए जा रहे 240 रूपये

दो के स्थान पर एक ही गणवेश के दिए जा रहे पैसे, उसमें भी कटौती

* जिले में 1 लाख 1 हजार 331 विद्यार्थी
अमरावती /दि.4– महाराष्ट्र सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए निःशुल्क गणवेश योजना के तहत एक गणवेश की किमत 300 रूपये निर्धारित की है, लेकिन स्थानिय जिला परिषद प्रशासन ने जिले की स्कूलों को प्रति गणवेश केवल 240 रूपये की राशी उपलब्ध कराये जाने से शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिती और पालकों में असंतोष व्याप्त है. जिले में निःशुल्क गणवेश योजना के पात्र कुल 1 लाख 1 हजार 331 लाभार्थी विद्यार्थी है.
प्रत्येक विद्यार्थी को दो गणवेश देने का निर्णय हुआ है, लेकिन अभी दो गणवेश के स्थान पर एक ही गणवेश के पैसे दिए जा रहे है. उसमें भी कटौती की गई है. इस कारण इतने कम पैसे में गणवेश कैसे उपलब्ध होगा यह सवाल उपस्थित हुआ है. राज्य सरकार ने इस वर्ष योजना में कई बदलाव करते हुए गणवेश वितरण की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन समिती को सौंपी है तथा महिला बचत समुह के माध्यम से सिलाई कराने पर जोर दिया है. शिक्षा क्षेत्र से जुडे लोगों का कहना है कि वर्तमान बाजार दरों को देखते हुए 300 रूपये में भी एक गुणवत्ता पूर्वक गणवेश तैयार करना मुश्किल है. कपडे की किमत, सिलाई खर्च तथा परिवहन व अन्य लागतों को जोडने पर एक गणवेश की वास्तविक लागत 300 रूपये से अधिक पहुंच रही है. ऐसे में स्कूल को केवल 240 रूपये मिलने से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खडे हो रहे है.
स्कूलों के सामने आर्थिक संकट ः स्कूल प्रबंधन समितीयों का कहना है कि सरकार ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापुर्ण गणवेश उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है, लेकिन उपलब्ध करायी जा रही राशी और बाजार भाव में बडा अंतर है. यदि शेष राशी की व्यवस्था नहीं की गई तो कई स्कूलों के सामने आर्थिक संकट खडा हो सकता है.
दुसरी ओर पालकों का कहना है कि, सरकार मुफ्त गणवेश योजना का प्रचार तो कर रही है लेकिन वास्तविक खर्च का बोझ अप्रत्यक्ष रूप से स्कूलों और समाज पर डाला जा रहा है. शिक्षा जगत से जुडे लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर गणवेश उपलब्ध कराना चाहती है तो प्रति गणवेश मिलने वाली राशि को वास्तविक लागत के अनुरूप बढाना होगा, अन्यथा योजना का उद्देश अधूरा रह सकता है.

* शेष राशि दूसरे चरण में देंगे
पहले चरण में निःशुल्क गणवेश योजना हेतु जिले के लिए 2 करोड 43 लाख 19 हजार 440 रपयों का निधी प्राप्त हुआ है. उसी हिसाब से सभी स्कूलों को प्रति गणवेश 240 रूपये के हिसाब से निधि का वितरण सीईओ सत्यम गांधी के निर्देशानुसार स्कूलों को किया है. शेष राशि प्राप्त होते ही बकाया निधि का वितरण किया जाएगा. अभी एक गणवेश दिया जा रहा है. दिवाली से पहले दुसरा गणवेश भी मिलेगा.
– संघरत्न सरोदे, जिप शिक्षणाधिकारी

* स्कूल के पहले दिन ही वितरण अनिवार्य
शिक्षक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने मांग की है कि सरकार बाजार की मौजूदा दरों के अनुसार गणवेश की लागत का पुनर्मूल्यांकन करें और स्कूलों को पुरी राशि उपलब्ध कराये. उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण कपडा, बेहतर सिलाई और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए अनुदान राशि बढाना आवश्यक है. उल्लेखनिय है कि राज्य सरकार ने मोफत गणवेश योजना में गुणवत्ता नियंत्रण, कपडे की जांच तथा महिला बचत समूहों के माध्यम से सिलाई जैसे नए प्रावधान लागू किये है और शैक्षणिक सत्र के पहले दिन ही गणवेश वितरण अनिवार्य किया है.

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