मराठा समाज के लिए बड़ी खुशखबरी!

‘मराठा-कुणबी मंत्रालय’ की मांग को मिली मंजूरी!

* सरकार ने कई मांगें मानीं, मनोज जरांगे का बड़ा दावा
* सीएम फडणवीस और मंत्री विखे पाटील का जताया आभार
जालना/मुंबई – मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील ने मराठा समाज के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए दावा किया है कि राज्य सरकार ने स्वतंत्र ‘मराठा-कुणबी मंत्रालय’ स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जरांगे के इस दावे के बाद मराठा समाज में उत्साह का माहौल है और इसे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.
बता दें कि मराठा समाज को ओबीसी वर्ग के समान सुविधाएं, शिक्षा और रोजगार में अवसर उपलब्ध कराने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है. हाल ही में जालना जिले के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे ने कड़ी धूप में आमरण अनशन शुरू किया था. इसके बाद राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुई चर्चाओं के परिणामस्वरूप सरकार ने कई मांगों को स्वीकार किया. इसी क्रम में राज्य सरकार ने हाल ही में एक शासन निर्णय (जीआर) जारी किया है, जिसके तहत मराठा समाज को ओबीसी समाज की तरह विभिन्न शासकीय योजनाओं और सुविधाओं का लाभ देने का रास्ता खुल गया है. इस निर्णय को मराठा समाज के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है.
आज एक मराठी न्यूज चैनल से बातचीत में मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार द्वारा मराठा समाज की मांगों को स्वीकार करना सकारात्मक कदम है. उन्होंने कहा कि अभी कुछ और निर्णय लिए जाने बाकी हैं, लेकिन अब तक जो फैसले हुए हैं, वे समाज के हित में हैं. जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लेते हुए कहा कि समाज की समस्याओं को समझते हुए सरकार ने सकारात्मक भूमिका निभाई है. उन्होंने मराठा आरक्षण विषयक उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटील का भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया.
* ‘काम होगा तो श्रेय भी देंगे’
मनोज जरांगे ने कहा कि उनकी भूमिका हमेशा से स्पष्ट रही है कि यदि सरकार समाज के हित में निर्णय लेती है, तो उसे उसका श्रेय भी दिया जाना चाहिए. इसी भावना के तहत उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को धन्यवाद देते हुए दावा किया कि मराठा-कुणबी मंत्रालय की स्थापना को भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है. जरांगे के अनुसार, मराठा समाज के विकास, कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए लंबे समय से अलग मंत्रालय की मांग की जा रही थी. यदि यह मंत्रालय अस्तित्व में आता है तो समाज से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा और विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सकेगा.
* आधिकारिक घोषणा का इंतजार
यद्यपि मनोज जरांगे ने मंत्रालय को मंजूरी मिलने का दावा किया है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना या औपचारिक घोषणा जारी नहीं की गई है. इसलिए अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वास्तव में मराठा-कुणबी मंत्रालय की स्थापना होती है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति और मराठा समाज के आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है. वहीं मराठा समाज के विभिन्न संगठनों ने भी इस दावे का स्वागत करते हुए सरकार से जल्द से जल्द औपचारिक घोषणा करने की मांग की है. मराठा आंदोलन के लंबे संघर्ष के बीच मनोज जरांगे का यह दावा राज्य की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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