मराठा आंदोलन फिर हुआ आक्रामक

मंत्री विखे पाटील के बंगले पर धरना

* आश्वासनों पर अमल नहीं होने का आरोप
* आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मुंबई/दि.9 – मराठा आरक्षण और समाज की विभिन्न मांगों को लेकर राज्य में एक बार फिर आंदोलन तेज होने के संकेत मिले हैं. मंगलवार को मराठा आंदोलनकारियों ने मराठा उपसमिति के अध्यक्ष तथा राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के सरकारी निवास पर पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया. आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार ने मराठा समाज को दिए गए आश्वासनों की पूर्ति में टालमटोल की नीति अपनाई है और अब तक किसी महत्वपूर्ण मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
मराठा क्रांति ठोक मोर्चा के समन्वयक रमेश केरे पाटील के नेतृत्व में पहुंचे आंदोलनकारियों ने विखे पाटील को एक ज्ञापन सौंपते हुए लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की. इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि हाल ही में अनशन समाप्त करने वाले मनोज जरांगे पाटील और राज्य सरकार के बीच फिर से तनाव की स्थिति बन सकती है.
* उपसमिति के आश्वासनों पर सवाल
आंदोलनकारियों का कहना है कि मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन और उपोषण के दौरान सरकार तथा मराठा उपसमिति की ओर से कई आश्वासन दिए गए थे. समाज को उम्मीद थी कि इन मांगों पर शीघ्र निर्णय होगा, लेकिन अब तक अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है. रमेश केरे पाटील ने आरोप लगाया कि सरकार ने जिन शासन निर्णयों (जीआर) की घोषणा की है, उनसे मराठा समाज के बड़े वर्ग को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास 1967 पूर्व की कुणबी नोंद उपलब्ध है, केवल उन्हीं को प्रमाणपत्र मिलने की व्यवस्था की जा रही है. इससे बड़ी संख्या में मराठा परिवार लाभ से वंचित रह सकते हैं.
* सरकार पर दिशाभ्रम का आरोप
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि उपोषण के दौरान मराठा समाज को यह विश्वास दिलाया गया था कि आरक्षण और संबंधित मुद्दों पर व्यापक समाधान निकाला जाएगा, लेकिन वास्तविकता में स्थिति अलग दिखाई दे रही है. केरे पाटील ने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र के अनेक मराठा परिवारों को अपेक्षित लाभ मिलने की संभावना कम है. उनका आरोप है कि समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय नहीं लिए गए और आंदोलनकारियों को भ्रमित किया गया है.
* बंगले में पहुंचकर किया धरना
मंत्रिमंडल की बैठक के लिए रवाना होने से पहले राधाकृष्ण विखे पाटील के निवास पर आंदोलनकारियों ने पहुंचकर धरना शुरू किया. आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार को अब केवल आश्वासन देने के बजाय समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए. धरना देने वालों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो राज्यभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
* जलसमाधि आंदोलन की भी घोषणा
इसी बीच मराठा क्रांति ठोक मोर्चा ने छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रस्तावित अरबी सागर स्मारक के मुद्दे को लेकर भी आंदोलन की घोषणा की है. संगठन ने मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर जलसमाधि आंदोलन करने का ऐलान किया है. पुलिस ने एहतियात के तौर पर कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है.
* सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
धरने और आंदोलन के बावजूद सरकार या मराठा उपसमिति की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि आंदोलनकारियों की नाराजगी दूर नहीं की गई तो आने वाले दिनों में मराठा आंदोलन एक बार फिर राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन सकता है. फिलहाल आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और मांगों पर ठोस अमल होने तक संघर्ष जारी रखेंगे.

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