श्री गौरक्षण संस्था में छप्पन भोग महोत्सव

माहेश्वरी महिला मंडल का अनूठा आयोजन

धामणगांव रेलवे/दि.11- स्थानीय माहेश्वरी महिला मंडल, तहसील माहेश्वरी महिला संगठन तथा बहु-बेटी मंडल के संयुक्त तत्वावधान में श्री गौरक्षण संस्था में गौमाता के प्रति श्रद्धा, आस्था एवं सेवाभाव प्रकट करने के उद्देश्य से भव्य छप्पन भोग महोत्सव का आयोजन किया गया. धार्मिक व भक्तिमय वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने गौमाता की विधिवत पूजा-अर्चना कर विविध प्रकार के व्यंजन एवं पशु आहार का भोग अर्पित किया.
कार्यक्रम का शुभारंभ गौ-पूजन से हुआ. उसके पश्चात महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए गौमाता की महिमा का गुणगान किया. पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक उर्जा का वातावरण बना रहा. महिलाओं ने प्रेम एवं समर्पण भाव से गौमाता को छप्पन भोग अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा बाद में गायों को प्रसाद स्वरुप विभिन्न व्यंजन खिलाए. छप्पन भोग में पारंपरिक भारतीय व्यंजनों और मिठाईयों का विशेष रुप से समावेश किया गया. पुरणपोली, मालपुआ, गुजिया सहित अनेक स्वादिष्ट पकवानों को आकर्षक ढंग से सजाकर गौमाता को समर्पित किया गया. इस दौरान उपस्थित महिलाओं ने गौसेवा को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अभिन्न अंग बताते हुए गौ संरक्षण का संदेश भी दिया.
इस अवसर पर माहेश्वरी महिला संगठन की अध्यक्षा सुनीता भूतडा ने कहा कि, भारतीय संस्कृति में गौमाता को मातृत्वस्वरुप एवं पूजनीय माना गया है. गौसेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि संवेदनशील और संस्कारित समाज की पहचान भी है. उन्होंने बताया कि, समाज में गौ संरक्षण और सेवा के प्रति जागरुकता बढाने के उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते है. कार्यक्रम में माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने बडी संख्या में उपस्थित रहकर गौ-पूजन एवं भजन-कीर्तन में सहभाग लिया.
कार्यक्रम को सफल बनाने माहेश्वरी महिला मंडल की अध्यक्षा सुनीता मुंधडा के नेतृत्व में पूजा राठी, प्रेमा राठी, सारिका राठी, सपना राठी, सखी राठी, पूनम इंद्राणी, छाया मुंधडा, सुषमा गांधी, जयश्री मुंधडा, तोषिका राठी, अर्चना मुंधडा, प्रिती गांधी, ममता राठी, निशा मुंधडा, अलका लोहिया, साक्षी मुंधडा, उर्मिला मुंधडा, सीमा चांडक, प्रिती भैया, किरण इंद्राणी, लता इंद्राणी, प्रणिता मुंधडा, भावना चांडक ने अथक प्रयास किए. श्रद्धा सेवा और सांस्कृती के संगम बने इस आयोजन ने न केवल गौ-माता के प्रति सम्मान और समर्पण का भाव प्रकट किया. बल्कि समाज में गौ सेवा एवं भारतीय परंपराओं के संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश भी दिया.

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