डेढ साल में अमरावती वासियों को लगा 9 करोड का ऑनलाइन चूना
ऑनलाइन जालसाजी के 59 मामले हुए दर्ज, 11 आरोपी गिरफ्तार

* शेयर मार्केट निवेश के नाम पर धोखाधडी के सर्वाधिक 23 मामले
* डिजीटल अरेस्ट, वर्कफ्रॉम होम, ऑनलाइन जॉब के नाम पर भी जबर्दस्त धोखाधडी
* समय सूचकता व सतर्कता के चलते बचाई जा सकी 1.82 करोड रूपयों की रकम
अमरावती/दि.11 – इन दिनों जिले में साइबर अपराधियों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है. निवेश पर भारी मुनाफे का लालच, डिजिटल अरेस्ट की धमकी, फर्जी नौकरी, सोशल मीडिया और ऑनलाइन लोन जैसे माध्यमों से नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है. वर्ष 2025 और वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराधियों ने डेढ़ वर्ष के भीतर 59 मामलों में करीब 8 करोड़ 91 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया है. हालांकि पुलिस की सक्रियता से कुछ राशि होल्ड कर पीड़ितों को वापस दिलाने में सफलता मिली है, लेकिन ठगी की रकम और मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है.
* वर्ष 2025 में 42 मामले, 6.68 करोड़ रुपये की ठगी
सन 2025 में साइबर अपराध के कुल 42 मामले दर्ज किए गए. इन मामलों में नागरिकों से 6 करोड़ 68 लाख 27 हजार 369 रुपये की धोखाधड़ी की गई. सबसे अधिक 16 मामले शेयर मार्केट निवेश से जुड़े रहे. साइबर अपराधियों ने लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से अपने जाल में फंसाया. इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के 8 मामलों में अपराधियों ने खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को भयभीत किया और बैंक खातों में रकम जमा करवायी. सोशल मीडिया के माध्यम से 5, फर्जी लिंक के जरिए 4, गूगल प्लेटफॉर्म से जुड़े 3, ऑनलाइन जॉब के 2, एपीके फाइल डाउनलोड करवाकर 2 तथा डेबिट-क्रेडिट कार्ड से संबंधित 1 मामला दर्ज हुआ.
वर्ष 225 में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 77 लाख 60 हजार 39 रुपये की राशि होल्ड करवाई, जबकि 52 लाख 91 हजार रुपये पीड़ितों को वापस दिलाने में सफलता हासिल की. वर्षभर में साइबर अपराध से जुड़े 11 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया.
* वर्ष 2026 में भी जारी है साइबर ठगी का सिलसिला
वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही साइबर अपराध के 17 मामले सामने आ चुके हैं. इन मामलों में 2 करोड़ 22 लाख 86 हजार 338 रुपये की ठगी की गई है. इनमें भी शेयर मार्केट के नाम पर ठगी के 7 मामले दर्ज हुए हैं, जो इस श्रेणी में सबसे अधिक हैं. इसके अलावा ऑनलाइन धोखाधड़ी के 3 मामले, जबकि वर्क फ्रॉम होम, यूट्यूब चैनल, लोन, ऑनलाइन ई-लिलाव, मोबाइल टॉवर, डेबिट कार्ड तथा डिस्ट्रीब्यूटर के नाम पर एक-एक मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने इस वर्ष अब तक 45 लाख 40 हजार 307 रुपये की राशि होल्ड करवाई है तथा 6 लाख 30 हजार रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए हैं.
* एक नजर में साइबर अपराध के आंकड़े
– वर्ष मामले ठगी गई राशि
2025 42 6,68,27,369
2026 17 2,22,86,338
कुल 59 8,91,13,707 – राशि रिकवरी की स्थिति
विवरण राशि
2025 में होल्ड राशि 77,60,039
2025 में वापस दिलाई गई राशि 52,91,000
2026 में होल्ड राशि 45,40,307
2026 में वापस दिलाई गई राशि 6,30,000
कुल होल्ड राशि 1,23,00,346
कुल वापस दिलाई गई राशि 59,21,000 – साइबर ठगी के प्रमुख प्रकार
प्रकार 2025 2026 कुल
शेयर मार्केट 16 7 23
डिजिटल अरेस्ट 8 – 8
सोशल मीडिया 5 – 5
लिंक फ्रॉड 4 – 4
ऑनलाइन धोखाधड़ी – 3 3
ऑनलाइन जॉब/वर्क फ्रॉम होम 2 1 3
गूगल आधारित ठगी 3 – 3
एपीके फाइल 2 – 2
डेबिट/क्रेडिट कार्ड 1 1 2
अन्य 1 4 5
* निवेश और कमाई के लालच में फंस रहे लोग
आंकड़ों से स्पष्ट है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक बैंकिंग फ्रॉड से आगे बढ़कर निवेश, ट्रेडिंग, ऑनलाइन रोजगार और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं. शेयर मार्केट से जुड़े 23 मामलों का सामने आना बताता है कि जल्दी अमीर बनने की चाहत का फायदा ठग उठा रहे हैं. वहीं डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का भय दिखाकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठ रहे हैं.
* पुलिस की अपील
साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, मोबाइल में अज्ञात एपीके फाइल डाउनलोड न करें, सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर भरोसा न करें तथा किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं. अधिकारियों का कहना है कि शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी, रकम होल्ड कर वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक रहेगी.
साइबर अपराधों के लगातार बढ़ते मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी जागरूकता ही इस नई चुनौती से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है. प्रशासन और पुलिस के साथ-साथ नागरिकों को भी सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है.





