श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह

पं. शरदचंद्र भारद्वाज ने भागीरथ गंगा के प्राकट्य की कथा वर्णन किया

धामणगांव रेलवे /दि.12 – स्थानीय श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के चतुर्थ दिवस कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ओतप्रोत दिव्य प्रसंगों का रसास्वादन किया. कथाव्यास आचार्य पं. शरदचंद्र भारद्वाज ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों का सरल एवं प्रेरणादायी विवेचन करते हुए मानव जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने सर्वप्रथम ध्रुवजी के वंश का वर्णन करते हुए बताया कि, दृढ संकल्प, तपस्या और भगवान के प्रति अतूट श्रद्धा से मनुष्य असंभव को भी संभव बना सकता है. इसके पश्चात पुरंजन उपाख्यान का मार्मिक वर्णन किया गया, जिसमें बताया गया कि, मनुष्य किस प्रकार माया, मोह और सांसारिक भोगों में उलझकर अपने अमूल्य जीवन को व्यर्थ गंवा देता है तथा आत्मकल्याण के मार्ग से भटक जाता है.
पं. शरदचंद्र भारद्वाज ने आगे भगवान ऋषभदेव एवं उनके पुत्र जडभरत के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि, सच्चा भक्त संसार की मोह-माया से परे रहकर ईश्वर भक्ति में लीन रहता है. जडभरत द्वारा राजा राहुगण को दिए उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि, प्रत्येक जीव में परमात्मा का वास है, इसलिए सभी प्राणियों के प्रति प्रेम, कल्याण और समभाव रखना ही सच्चा धर्म है. इस दौरान अजामिल उपाख्यान के माध्यम से हरिनाम संकीर्तन का महत्व समझाया गया. पं. भारद्वाज ने कहा कि, जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि श्रद्धा से भगवान का नाम स्मरण किया जाए, तो वह मनुष्य के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है. हरिनाम की महिमा अनंत है और यही कलियुग में मुक्ति का सबसे सरल साधन है.
कथा वाचक पं. भारद्वाज ने भागीरथ गंगा के प्राकट्य की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि, राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ. जिससे असंख्य जीवों का उद्धार संभव हुआ. गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि आस्था, पवित्रता और मोक्ष की प्रतिक है. कथा के दौरान भगवान नृसिंह अवतार एव भक्त प्रल्हाद चरित्र का भी वर्णन किया गया. प्रल्हाद की अटूट भक्ति और भगवान द्वारा भक्त की रक्षा हेतु स्तंभ से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध करने की कथा श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. पं. भारद्वाज ने कहा कि, भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते है और सच्ची भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती.
कथा के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन की प्रेरणा दी गई. जिसमें उन्होंने कहा कि, भगवान राम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्यपरायणता, माता-पिता की सेवा तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व का अनुपम उदाहरण है. कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव रहा. श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन होते ही पूरा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की…’ के जयघोष से गूंज उठा. इस अवसर पर आकर्षक एवं मनमोहक झांकियां प्रस्तुत की गई. जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. श्रद्धालु भक्तों ने उत्साहपूर्वक जन्मोत्सव मनाया तथा भजनों और संकीर्तन के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत किया. कथा के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद का वितरण किया गया. कथा में बडी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे है.

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