22 जून से शुरू होगा महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र

किसान कर्जमाफी समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

* तीन सप्ताह चलेगा सत्र, विपक्ष आक्रामक
* नाना पटोले बोले- एक महीने का होना चाहिए था सत्र
मुंबई /दि.15- महाराष्ट्र विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तारीख तय हो गई है. कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद घोषित कार्यक्रम के अनुसार राज्य विधानमंडल का मानसून सत्र 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलेगा. लगभग तीन सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में किसान कर्जमाफी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक घटनाक्रम जैसे कई मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है.
* कर्जमाफी का मुद्दा रहेगा केंद्र में
हाल ही में राज्य सरकार ने किसानों के लिए दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा की है. हालांकि, योजना में शामिल कुछ शर्तों को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं. योजना के अनुसार जिन किसानों का कर्ज दो लाख रुपये से अधिक है, उन्हें पहले बकाया राशि जमा करनी होगी, उसके बाद ही कर्जमाफी का लाभ मिलेगा. इसी शर्त के विरोध में रोहित पवार ने अन्नत्याग आंदोलन भी किया था. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र में किसान कर्जमाफी का मुद्दा सबसे प्रमुख रहेगा और विपक्ष सरकार को इस विषय पर घेरने का प्रयास करेगा.
* नाना पटोले ने सरकार पर साधा निशाना
सत्र की घोषणा के बाद कांग्रेस नेता नाना पटोले ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में कई गंभीर मुद्दे लंबित हैं और ऐसे में सत्र की अवधि अधिक होनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि यह सत्र केवल 14 कार्य दिवसों का होगा, जबकि कांग्रेस की मांग थी कि सत्र कम से कम एक महीने तक चले. पटोले ने आरोप लगाया कि राज्य में जनता के बीच व्यापक असंतोष है, लेकिन सरकार केवल अनुपूरक मांगों को मंजूरी दिलाने तक सीमित रहना चाहती है.
* ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर भी गरमाएगा माहौल
सत्र से पहले राज्य की राजनीति में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ और शिवसेना उबाठा के कुछ सांसदों के संभावित दल-बदल की चर्चाएं भी तेज हैं. इस मुद्दे पर नाना पटोले ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश और राज्यों में विपक्षी दलों को कमजोर करने की राजनीति की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि क्षेत्रीय दलों को तोड़ने की कोशिशें लगातार जारी हैं. 22 जून से शुरू होने वाला यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विपक्ष जहां विभिन्न जनहित मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार भी अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को सदन में मजबूती से रखने की रणनीति बना रही है.

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