जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए दर-दर भटक रहे नागरिक

मनपा विरोधी पक्ष नेता विलास इंगोले का आरोप

*किरीट सोमैय्या के दौरे के बाद बढा प्रशासनिक दबाव
अमरावती/दि.18-स्थानिय मनपा में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है. प्रमाणपत्रों के लिए लोगों को बार-बार कार्योलयों के चक्कर लगाने पड रहे है. इस मुद्दे को लेकर मनपा के विरोधी पक्ष नेता विलास इंगोले ने राज्य सरकार की आईटी प्रणाली और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खडे किए है.
नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने आरोप लगाया कि, राज्य सरकार की डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है. जिसके कारण सामान्य नागरिकों को बुनियादी दस्तावेज प्राप्त करने में भी कठिनाईयों का सामना करना पड रहा है. उन्होंने कहा कि, कुछ दिन पहले भाजपा नेता किरीट सोमैय्या व्दारा महानगर पालिका में आयोजित बैठक के बाद प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बढ गया है.जिससे जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है.
विलास इंगोले ने कहा कि, किरीट सोमैय्या के आरोपों और हस्तक्षेप के कारण प्रशासनिक कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बना है. इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड रहा है, जिन्हें प्रमाणपत्र प्राप्त करने कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड रहे है. महिने में 2 हजार प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमती
जन्म और मृत्यु पंजिकरण प्रक्रिया में तकनिकी और प्रशासकीय अडचनों के चलते फिलहाल शहर में हर महिने केवल 2 हजार प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमती है. शहर की जनसंख्या और वास्तविक आवश्यकता को देखते हुए यह संख्या बेहद कम मानी जा रही है. राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए स्वास्थ्य अधिकारी को निबंधक नियुक्त किया है, लेकिन इसके बावजुद व्यवस्थागत समस्याएं दूर नहीं हो सकी है. परिणाम स्वरूप नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यो के लिए भी मनपा के चक्कर काटने पड रहे है.                                           10 करोड बकाया रखनेवाले बीओटी धारकों पर कार्रवाई कब
नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने मनपा कर वसुली नीति पर भी सवाल उठाए . उन्होंने कहा कि , प्रशासन एक ओर आम ओर मध्यमवर्गीय संपत्ति धारकों से सख्ती से कर वसुल रहा है, जबकि दूसरी ओर बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसर्फर)आधार पर संचालित व्यवसायिक परिसरों पर 10 करोड रूपए से अधिक का कर बकाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि, बडे बकायादारों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है. विलास इंगोले ने प्रशासन से मांग की है कि बिओटी परिसरों से प्रलंबित कर राशि तत्काल वसुल की जाए. यदि ऐसा संभव नहीं है तो इन परिसरों को स्थायी रूप से संबंधित धारकों के नाम कर दिया जाए. लंबे समय से प्रलंबित कर बकाया के मामले मेें अब मनपा को स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि राज्यस्व हानि को रोका जा सके और कर व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे.

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