विधानसभा में गूंजा विदर्भ के टाइगर प्रोजेक्ट्स का फंड डायवर्जन मामला
वन विभाग से राज्य सरकार ने तलब की विस्तृत रिपोर्ट

अमरावती/दि. 24 – विदर्भ के प्रमुख टाइगर रिजर्वों के लिए आवंटित निधि को अन्य मदों में खर्च किए जाने का मामला अब राज्य विधानसभा के मानसून सत्र तक पहुंच गया है. मेलघाट, ताडोबा, पेंच, नवेगांव-नागजीरा और बोर टाइगर रिजर्व के संरक्षण कार्यों के लिए निर्धारित करोड़ों रुपये की निधि अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ.
दर्यापुर से विधायक गजानन लवटे ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), नागपुर से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. बताया जाता है कि 14 जून को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया. मानसून सत्र में इसे ‘लक्षवेधी सूचना’ के माध्यम से उठाया गया, जिसके बाद सरकार को मामले की जांच के आदेश देने पड़े। सोमवार को नागपुर स्थित वन भवन में सरकारी पत्र पहुंचते ही वन विभाग में हलचल मच गई.
* मेलघाट और पेंच को सबसे बड़ा झटका
जानकारी के अनुसार, मेलघाट टाइगर रिजर्व से लगभग 7 करोड़ रुपये की निधि अन्यत्र स्थानांतरित की गई है. वहीं पेंच और ताडोबा टाइगर रिजर्व से करीब 2.5-2.5 करोड़ रुपये तथा नवेगांव-नागजीरा परियोजना से लगभग 70 लाख रुपये डायवर्ट किए गए हैं. वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, नैशनल टाइगर कन्जर्वेशन अॅथोरिटी की ओर से इस वर्ष पूर्ण निधि उपलब्ध नहीं कराई गई है. साथ ही राज्य सरकार ने भी राज्य योजना में अपेक्षित वित्तीय प्रावधान नहीं किया, जिससे वन्यजीव संरक्षण और वन प्रबंधन संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं.
* वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल
विधानसभा में विपक्ष ने आरोप लगाया कि टाइगर प्रोजेक्ट्स और टाइगर फाउंडेशन के लिए निर्धारित निधि में कटौती के कारण जंगलों में गश्त, जलस्रोतों के रखरखाव और वन्यजीव सुरक्षा संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं. विधायक गजानन लवटे ने कहा कि इससे विदर्भ के वन क्षेत्रों और बाघ संरक्षण अभियान पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. सूत्रों के अनुसार, विदर्भ के टाइगर प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित निधि का उपयोग पश्चिमी महाराष्ट्र के जुन्नार तथा कोंकण क्षेत्र के सावंतवाड़ी में तेंदुए के हमलों में मृत लोगों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए किया गया. इस खुलासे के बाद सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है. फिलहाल राज्य सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है और वन विभाग से जल्द स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है.