पैर में खून का थक्का बन सकता है जानलेवा
फेफड़ों तक पहुंचते ही बढ़ जाता है मौत का खतरा

अमरावती /दि.26– पैरों की गहरी नसों में बनने वाला खून का थक्का यदि टूटकर रक्त प्रवाह के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो यह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है. इस गंभीर बीमारी को पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है.
* क्या है पल्मोनरी एम्बोलिज्म?
विशेषज्ञों के अनुसार, पैरों की गहरी नसों में बनने वाले खून के थक्के को डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहा जाता है. जब यही थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों की धमनियों तक पहुंचकर उन्हें अवरुद्ध कर देता है, तो फेफड़ों में रक्त प्रवाह रुक जाता है. इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है.
* क्या हो सकते हैं खतरे?
पल्मोनरी एम्बोलिज्म की स्थिति में मरीज को अचानक सांस लेने में तकलीफ, सीने में तेज दर्द, रक्तचाप का खतरनाक रूप से गिरना, हृदय पर दबाव बढ़ना, फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होना, हार्ट अटैक और यहां तक कि मौत का भी खतरा हो सकता है.
* किन कारणों से बढ़ता है जोखिम?
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक एक ही जगह बैठे या लेटे रहना, बड़ी सर्जरी या गंभीर दुर्घटना के बाद, कैंसर और उसका उपचार, गर्भावस्था और प्रसव के बाद का समय, मोटापा और धूम्रपान, परिवार में पहले से ब्लड क्लॉट बनने का इतिहास, हार्मोनल दवाओं का सेवन इससे बीमारी होने की आशंका अधिक रहती है.
* ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द, खांसी के साथ खून आना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना या बेहोशी, पैरों में सूजन, दर्द या भारीपन, किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत? 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, कैंसर मरीज, हाल ही में ऑपरेशन कराने वाले मरीज, लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले लोग, मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति, पहले डीवीटी या पल्मोनरी एम्बोलिज्म झेल चुके मरीज तथा गर्भवती और प्रसव के बाद की महिलाओं में इसका खतरा अधिक रहता है.
* कोरोना और लंबी यात्रा भी बढ़ाती है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के बाद भी शरीर में खून के थक्के बनने की संभावना बढ़ सकती है. वहीं, हवाई जहाज, बस या कार में लगातार 4 से 6 घंटे या उससे अधिक समय तक बैठे रहने से पैरों में रक्त प्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिससे डीवीटी और पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा बढ़ सकता है.
* कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियमित रूप से पैदल चलने और व्यायाम करने की सलाह देते हैं. लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें, यात्रा के दौरान हर घंटे पैरों को हिलाते-डुलाते रहें, पर्याप्त पानी पिएं, धूम्रपान से दूर रहें और वजन नियंत्रित रखें. यदि डॉक्टर सलाह दें तो रक्त पतला करने वाली दवाओं का नियमित सेवन करें. पैरों में अचानक सूजन, दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर जांच और उपचार से इस गंभीर बीमारी से होने वाले जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.





