जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से निकाले गए करोड़ों के आदेश

नगरसेवक आधी रात गिरफ्तार

गड़चिरोली/दि.29 – गड़चिरोली के जिलाधिकारी के फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर करीब 4 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए फर्जी प्रशासनिक मंजूरी जारी करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आशिष पिपरे को छत्रपति संभाजीनगर से रविवार देर रात गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है.
गिरफ्तार आरोपी आशिष पिपरे चामोर्शी नगर पंचायत का नामित (स्वीकृत) नगरसेवक है. उसकी पत्नी भाजपा की नगरसेविका है. हालांकि, भाजपा जिला अध्यक्ष के अनुसार पिपरे को लगभग तीन महीने पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. बताया जाता है कि भाजपा में रहते हुए उसने कांग्रेस समर्थित गुट के माध्यम से नगरसेवक का पद हासिल किया था. पुलिस जांच में सामने आया है कि फर्जी लेटरहेड और जिलाधिकारी के नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से जुड़े विकास कार्यों के लिए फर्जी प्रशासनिक मंजूरी आदेश तैयार किए गए थे. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, आशिष पिपरे पहले एक पूर्व राज्यमंत्री के निजी सहायक (पीए) के रूप में भी काम कर चुका है. पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्य और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस मामले में और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं तथा आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इससे पहले भी इसी तरह फर्जी प्रशासनिक मंजूरी जारी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया था. यदि ऐसा पाया जाता है, तो यह मामला केवल एक फर्जी आदेश तक सीमित न रहकर बड़े फर्जीवाड़े का रूप ले सकता है. जिलाधिकारी जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर शासन को गुमराह करने की कोशिश को बेहद गंभीर मानते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.

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