किसी नियम या सेवा शर्त का उल्लंघन नहीं किया, संविधान के प्रति पूरी निष्ठा
संघ के कार्यक्रम में शामिल होने पर उठे सवालों पर विश्वास नांगरे पाटिल का स्पष्टीकरण

नागपुर/दि.29- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में शामिल होने और वहां दिए गए भाषण को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच नव नियुक्त नागपुर पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने पहली बार खुलकर अपनी भूमिका स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि संबंधित कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने अपनी सेवा शर्तों या किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है तथा उनकी पूरी प्रतिबद्धता संविधान और उसके मूल्यों के प्रति है.
सोमवार को नागपुर पुलिस आयुक्त का पदभार संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा कि नागपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में पहली बार काम करने का अवसर मिला है. मुख्यमंत्री द्वारा उन पर जताए गए विश्वास को बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना, महिला एवं बाल सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा जनकेंद्रित पुलिसिंग उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताएं होंगी. उन्होंने कहा कि आईपीएस में ‘एस’ का अर्थ सर्विस यानी सेवा है. पुलिस से केवल अपराधियों को डरना चाहिए, आम नागरिकों को नहीं.
* संघ के कार्यक्रम में जाने पर दी सफाई
संघ के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर हो रही आलोचना पर नांगरे पाटिल ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से पुलिस सेवा में हैं और विभिन्न धर्मों तथा सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं. उन्होंने बताया कि जिस कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह 19 अप्रैल को आयोजित हुआ था और उसमें कई प्रतिष्ठित नागरिक मौजूद थे. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में जीएसटी संबंधी मार्गदर्शन, आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा तथा सामाजिक मुद्दों पर संवाद हुआ था. उन्होंने वहां युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या, पुलिस विभाग में उपलब्ध अवसरों और मानव कल्याण जैसे विषयों पर अपने विचार रखे थे.
विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा कि वे रमजान ईद, इफ्तार कार्यक्रमों, जैन और सिख समुदाय के आयोजनों में भी शामिल होते रहे हैं. उसी क्रम में वे इस कार्यक्रम में भी गए थे. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करना नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद में भाग लेना था.
* संविधान और डॉ. आंबेडकर के विचारों के प्रति प्रतिबद्धता
नागपुर के नवनियुक्त पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा कि नागपुर दीक्षाभूमि की धरती है और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार उनके लिए मार्गदर्शक हैं. उन्होंने दोहराया कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी निष्ठा पूरी तरह संविधान और कानून के शासन के प्रति है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम वंदे मातरम के 150 वर्ष तथा आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था और उसमें शामिल होना किसी भी प्रकार से सेवा नियमों के विरुद्ध नहीं था.
* मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने साधा था निशाना
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब राज ठाकरे ने नांगरे पाटिल की संघ के कार्यक्रम में मौजूदगी पर सवाल उठाए. ठाकरे ने कहा था कि एक आईपीएस अधिकारी की निष्ठा केवल अपने संवैधानिक दायित्वों के प्रति होनी चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि नांगरे पाटिल को संघ से इतनी ही निकटता है, तो उन्हें पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर संघ या राजनीति में शामिल हो जाना चाहिए. हालांकि, नांगरे पाटिल ने अपने स्पष्टीकरण में साफ कहा कि उन्होंने किसी राजनीतिक मंच से भाषण नहीं दिया और न ही किसी नियम का उल्लंघन किया है. उनके अनुसार, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में सहभागिता उनकी सार्वजनिक सेवा का हिस्सा है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.