शौचालय पर लडखडाते मान्यवरों की लोकप्रियता के फलक

अपने आकाओ की कद्र करो यार

परतवाडा/दि.29– इस कलमुहे जुडवां शहर और इन्द्रपुरी जिले के महान नेताओं के पीछे उनके कांधा समर्थकों की लंबी फौज भी निरंतर रहती है. इस फौज में तरह तरह के सिपहसालार, अमलदार भी होते है. नेताओं ने कुछ भी किया तो उसे लोकप्रियता की चाशनी में घोटकर डाबर की जलेबी बनाने में ये बंदे तज्ञ माने जाते है. अक्सर शहरभर में अपने अतिप्रिय नेताजी के फलक टांगने-टंगवाने का कार्य इन्ही. फलक बहादुरों के माध्यम से किया जाता है. इन दिनों परतवाडा के दुरानी चौक पर लगाए गए दो अदद फलक खासी चर्चा में है. चर्चा की वजह वो स्थली है. जहां इन महापुरुषों के फलक को टंगाया गया है. नगर पालिका ने हालही में इस चौक पर एक शौचालय बनाया है. ज्ञात और अज्ञात सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी इस शौचालय का विधिवत उद्घाटन होना बाकी है. यह उद्घाटन प्रत्यक्ष अनुभव लेकर होगा अथवा मात्र रिबन काटकर खानापूर्ति कर ली जाएंगी. इस बारे में नपा प्रशासन से कोई अधिकृत खबर नहीं मिली है. यह जरूर मालूम पडा कि कुछ साल पूर्व तक इसी शौचालय स्थली पर करीब दस दुकानदार अपनी जीविका चला रहे थे. उन्हें खदेडकर यहां शौचालय बना है. अब इस शौचालय का उपयोग मान्यवरों की लोकप्रियता के फलक टांगने के लिए किया जा रहा है. यह एक अच्छी शुरूआत कही जा सकती है.
पूरे परतवाडा-अचलपूर में बडी संख्या में शौचालय बने हुए है. मान्यवरों के फलक लगाने के लिए यदी इन सभी शौचालय का उपयोग किया जाए तो नगर की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे. इनमें रोजाना नित्यकर्म को जाते लोगो को नेताजी की खुबसूरत तस्वीरे देखने बाद ना तो गंदगी का अहसास होगा और ना ही बदबु सहन करनी पडेगी. आप शौच के लिए नीचे बैठे है और आपके सिर पर नेताजी टंगे है, तो क्या ही कहना एक ही झटके में पेट सफा. भाई लोगों ने क्या धांसू आइडिया ईजाद किया है. बोर्ड टांगने का.
नगर पालिका ने बीच में एक नगरसेवक के फलक को शहर के डिवाइडर से यह कहकर निकाल लिए थे, कि यह हाइकोर्ट के आदेश की अवहेलना है. ऐसा लगता है कि अदालत ने किसी भी सार्वजनिक शौचालय पर फलक लगाने की सहमति दे रखी है. फलक के लगते ही नेताजी की लोकप्रियता के कारण शौचालय की भी इज्जत, प्रतिष्ठा और मान मर्तबा में बहुत ज्यादा वृद्धि हो जाती. फीर वो खालिस देशी संडास न होकर ताज पैलेस के कमोड अथवा डोनाल्ड ट्रंप के पांच तारांकित बाथरूम में तब्दील हो जाता है. उन सभी कार्यकर्ताओं का दिल से धन्यवाद अदा किया जाना चाहिए जो अपने महान नेताओं की लोकप्रियता को शौचालय पर टांगने का काम पूरे दिल से कर रहे है. इस खाकसार की मजबूरी है कि शौचालय पर टांगे महापुरूषों की तस्वीर हम प्रकाशित करने में असमर्थ है. शहर का हवामान खराब करने का कोई इरादा नही है. छपास कांजीहाउस और कब्रिस्तान पर भी यदी मान्यवरों के फलक लटके दिखे तो किसी को कोई आश्चर्य नही होना चाहिए.

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