महिला आयोग में लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा हो
विधायक सुलभा खोडके ने उठाई मांग, विधानसभा में लगाई लक्षवेधी

* आयोग की व्यवस्था को और सशक्त बनाने का उठाया मुद्दा
* महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय की मांग
मुंबई/दि.29– महिलाओं पर अत्याचार, लैंगिक उत्पीड़न और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मामलों में न्याय प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर विधायक सुलभा संजय खोडके ने महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में लिखित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया. उन्होंने राज्य महिला आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे तथा दोनों आयोगों की कार्यप्रणाली को अधिक सक्षम बनाने की मांग की.
विधायक सुलभा खोडके ने अपने प्रस्ताव में कहा कि राज्य महिला आयोग के पास 1 अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक के दस माह की अवधि में महिला अत्याचार से संबंधित 16,608 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 2,777 मामले अभी भी लंबित हैं. इसी प्रकार बलात्कार से जुड़े 4,497 मामलों में से 733 शिकायतों का निपटारा अब तक नहीं हो सका है. इसके अलावा अप्रैल 2026 में कार्यस्थलों पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित 176 शिकायतें भी दर्ज की गई हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि महिला आयोग को अधिक प्रभावी बनाने, पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने और दोषियों को कठोर दंड सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. साथ ही पुलिस आयुक्तालयों और जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालयों को इस संबंध में क्या निर्देश दिए गए हैं, इसकी जानकारी भी मांगी.
* बच्चों के खिलाफ अपराधों पर भी जताई चिंता
सुलभा खोडके ने बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में बच्चों से जुड़े अपहरण, लैंगिक शोषण, बाल मजदूरी और मानव तस्करी जैसे 25 हजार से अधिक अपराध दर्ज हुए हैं. वहीं महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास लगभग 1,600 मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं. उन्होंने अमरावती पुलिस अधीक्षक क्षेत्र में आईटी क्षेत्र की महिला कर्मचारी से जुड़े कथित लैंगिक शोषण मामले तथा नाशिक पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र के एक अन्य मामले पर राज्य महिला आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्टों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी.
* महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने दिया जवाब
विधानसभा में लिखित उत्तर देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने बताया कि राज्य महिला आयोग के समक्ष लंबित शिकायतों का वर्गीकरण कर उनकी सुनवाई की जा रही है. इनमें दहेज प्रथा, लैंगिक असमानता, जातीय भेदभाव, बलात्कार, साइबर अपराध, लिंग आधारित हिंसा तथा अंधविश्वास से जुड़े मामले शामिल हैं. उन्होंने बताया कि इन श्रेणियों के अंतर्गत आने वाली 3,764 शिकायतों पर कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, जबकि 733 मामलों में अंतिम रिपोर्ट प्राप्त न होने के कारण प्रक्रिया जारी है. मंत्री ने यह भी बताया कि अमरावती पुलिस अधीक्षक क्षेत्र में आईटी क्षेत्र की महिला कर्मचारी से जुड़े लैंगिक उत्पीड़न प्रकरण में राज्य महिला आयोग ने पुलिस अधीक्षक, अमरावती से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और मामले की निगरानी की जा रही है.
* 138 फास्ट ट्रैक कोर्ट को मंजूरी
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे ने जानकारी दी कि बलात्कार और पॉक्सो कानून के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्य में 138 फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित करने को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिश पर सभी पुलिस आयुक्तालयों और जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में ‘विशेष बाल पुलिस पथक कक्ष’ स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं. विधायक सुलभा खोडके ने सरकार से महिला आयोग और बाल अधिकार आयोग की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने, लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने तथा पीड़ित महिलाओं और बच्चों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है और सरकार को इस दिशा में और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है.