सरकार के समक्ष अमरावती मनपा की हुंकार
17 करोड़ नहीं, 47 करोड़ का हक चाहिए

* जीएसटी अनुदान बढ़ाने के लिए शासन को भेजा विस्तृत प्रस्ताव
* अमरावती शहर की नौ लाख आबादी का दिया हवाला
अमरावती/दि.3 – लंबे समय से वित्तीय तंगी के साथ जूझ रही अमरावती महानगरपालिका ने अब अपने अधिकार के लिए खुलकर आवाज उठाई है. मनपा ने राज्य शासन से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान में मिलने वाला 17.66 करोड़ रुपये का जीएसटी भरपाई अनुदान शहर की जरूरतों के मुकाबले नाकाफी है. बढ़ती आबादी, बढ़ते खर्च और विकास कार्यों की आवश्यकताओं को देखते हुए यह अनुदान बढ़ाकर 47 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जाना चाहिए. इस मांग को लेकर मनपा प्रशासन ने 1 जुलाई को शासन को विस्तृत और तथ्याधारित प्रस्ताव भेजा है. खास बात यह है कि मनपा के इतिहास में पहली बार किसी निगमायुक्त ने शहर की जनसंख्या और राजस्व क्षमता के आधार पर आर्थिक असमानता का मुद्दा इतनी मजबूती से शासन के समक्ष रखा है.
* एलबीटी की खामियों का खामियाजा आज भी भुगत रहा शहर
अमरावती मनपा प्रशासन का कहना है कि वर्ष 2012 में जकात कर समाप्त होने के बाद लागू की गई एलबीटी व्यवस्था अमरावती के लिए घाटे का सौदा साबित हुई. व्यापारियों के कम पंजीकरण, कम कर दरों और वसूली में आने वाली दिक्कतों के कारण अपेक्षित आय नहीं मिल सकी. बाद में जब जीएसटी लागू हुआ तो इसी कम राजस्व को आधार बनाकर भरपाई अनुदान तय कर दिया गया. नतीजा यह हुआ कि अमरावती को वर्षों से कम अनुदान मिल रहा है और शहर आर्थिक नुकसान झेल रहा है.
* आंकड़ों ने खोली अनुदान व्यवस्था की पोल
मनपा प्रशासन की ओर से द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव में बताया गया है कि वर्ष 2011-12 में जकात कर से 78.78 करोड़ रुपये की आय हुई थी. यदि इसमें प्रतिवर्ष औसतन 15 प्रतिशत की प्राकृतिक वृद्धि को जोड़ा जाए तो वर्ष 2025-26 तक यह आय 556.37 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती थी. मनपा का दावा है कि यदि इसी आधार पर भरपाई अनुदान निर्धारित किया जाता तो आज अमरावती की वित्तीय स्थिति कहीं अधिक मजबूत होती.
* वेतन, पेंशन और विकास कार्यों पर संकट
आर्थिक संसाधनों की कमी का असर अब मनपा के नियमित कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है. कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं सड़क, जलापूर्ति, स्वच्छता और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध नहीं हो पा रही है. मनपा का मानना है कि यदि जीएसटी भरपाई अनुदान 47 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाता है तो वित्तीय संकट काफी हद तक दूर होगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी.
* मनपा ने की ‘आर्थिक न्याय’ की मांग
निगमायुक्त वर्षा लढ्ढा ने कहा कि अमरावती की वर्तमान आबादी और बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए जीएसटी भरपाई अनुदान की व्यवस्था पर पुनर्विचार आवश्यक है. वहीं स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि अन्य महानगरपालिकाओं की तरह अमरावती को भी उसकी जनसंख्या और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप अनुदान मिलना चाहिए. अब शहरवासियों की नजर शासन के निर्णय पर टिकी है. यदि मांग स्वीकार होती है तो मनपा को बड़ी आर्थिक राहत मिलने के साथ अमरावती के विकास को भी नई रफ्तार मिल सकती है.

शहर की लगातार बढती आबादी, सीमाओं के होते विस्तार मनपा की बढते दायित्व को देखते हुए जीएसटी भरपाई अनुदान की वर्तमान व्यवस्था पुनर्विचार किया जाना बेहद आवश्यक है. इस बात की ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार ने अमरावती महानगरपालिका को वर्तमान जनसंख्या एवं वास्तविक राजस्व क्षमता के अनुरूप न्यायोचित अनुदान देने का अनुरोध किया गया.
– वर्षा लढ्ढा, मनपा आयुक्त, अमरावती

राज्य की अन्य सभी महानगरपालिकाओं की तरह अमरावती महानगरपालिका को भी जनसंख्या के अनुपात में जीएसटी का अनुदान मिलना चाहिए. इस बारे में सरकार को आंकडों के साथ विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई है. जिसे लेकर हमें विश्वाास है कि सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय लिया जाए.
– अविनाश मार्डीकर, स्थायी समिती सभापती, अमरावती मनपा





