65 वर्षों में कितनी बार हुई गोरस भंडार की जांच पडताल

नागपुर हाईकोर्ट ने अन्न व औषध प्रशासन से मांगी जानकारी

* कडी फटकार लगाने के साथ ही एफडीए की कार्रवाई पर उठाए सवाल
नागपुर /दि.3– मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने गतरोज हुई सुनवाई के दौरान वर्धा स्थित गोरस भंडार पर हुई कार्रवाई पर सवालिया निशान उपस्थित करते हुए अन्न व औषधी प्रशासन विभाग को कडी फटकार लगाई. साथ ही विगत 65 वर्षों के दौरान गोरस भंडार की कितनी बार जांच पडताल की गई. इसकी जानकारी प्रस्तुत करने हेतु कहा. साथ ही गोरस भंडार पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए एफडीए को कडी फटकार भी लगाई.
उल्लेखनिय है कि, आयएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के एफडीए आयुक्त नियुक्त होने के बाद गोरस भंडार के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. इस कार्रवाई के खिलाफ वर्धा तहसील गो दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ मर्यादित संस्था ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की. जिस पर गतरोज न्या. अनिल किलोर व न्या. राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई. बता दे कि संस्था द्वारा संचालित गोरस भंडार के मार्फत रोजाना करीब 9 हजार लिटर दूध का संकलन व वितरण किया जाता है. वर्धा जिले के 15 गांवों में रहनेवाले करीब 800 परिवारों का उदरनिर्वाह इस माध्यम से ही होता है. विगत 31 मई को अन्न व औषध प्रशासन ने गोरस भंडार की जांच पडताल करते हुए परिसर में स्वच्छता का अभाव रहने का दावा कर गोरस भंडार पर ताला लगा दिया. साथ ही अगले आदेश तक दूध संकलन, विक्री व दुग्धजन्य पदार्थों के उत्पादन को रोकने का निर्देश भी दिया था. इस कार्रवाई के चलते किसानों व दूध उत्पादकों का काफी बडे पैमाने पर नुकसान होने का दावा याचिकाकर्ताओं द्वारा किया गया. याचिकाकर्ताओं की ओर से एड. फिरदोज मिर्जा व एड. एस.के. भोयर ने सफल युक्तीवाद किया.

* अदालत ने अधिकारियों को दी कार्रवाई की चेतावनी
नियमों का उल्लंघन करनेवालों पर अन्न व औषधी प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाती है. ठीक उसी तरह कार्रवाई करते समय कानून का उल्लंघन करनेवाले एफडीए प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए, ऐसा सीधा व सपाट सवाल अदालत द्वारा पूछा गया. साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि इस मामले में कोई भी अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई अवश्य की जाएगा.

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