इथेनॉल नीति को लेकर नितिन गडकरी निशाने पर
सोशल मीडिया पर विरोध अभियान तेज

नागपुर/दि.3- देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की केंद्र सरकार की नीति को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सोशल मीडिया पर विरोध का सामना कर रहे हैं. हालांकि किसी प्रमुख विपक्षी दल या उसके नेताओं की ओर से इस नीति का खुला विरोध देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर इथेनॉल मिश्रण के खिलाफ चल रहे अभियान ने राजनीतिक और औद्योगिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पिछले कई वर्षों से इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देते रहे हैं. वे विभिन्न मंचों और पत्रकार वार्ताओं में लगातार यह दावा करते रहे हैं कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता. लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रण संबंधी नीति को स्पष्ट रूप से आगे बढ़ाने के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ विरोधी स्वर तेज हो गए हैं.
* सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम
सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर कई लोग वीडियो और पोस्ट साझा कर यह दावा कर रहे हैं कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. इन दावों के साथ कुछ समूहों द्वारा 15 जुलाई को देशव्यापी बंद का आह्वान भी किया गया है. इस अभियान में किसानों, युवाओं और परिवहन व्यवसायियों के नाम का उपयोग करते हुए इथेनॉल नीति वापस लो जैसे नारे प्रसारित किए जा रहे हैं.
* विरोध के पीछे कौन?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि यह विरोध केवल आम उपभोक्ताओं की नाराजगी है या इसके पीछे कोई आर्थिक, औद्योगिक अथवा राजनीतिक हित समूह सक्रिय है. विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल नीति लागू होने से ईंधन आयात पर खर्च कम होगा, गन्ना उत्पादक किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में कुछ क्षेत्रों के आर्थिक हित प्रभावित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
* तकनीकी सवाल भी उठे
वाहन उद्योग से जुड़े कुछ विशेषज्ञों, उपभोक्ता संगठनों और वाहन मालिकों ने इथेनॉल मिश्रण को लेकर तकनीकी चिंताएं व्यक्त की हैं. विशेष रूप से पुराने वाहनों की इंजन क्षमता, ईंधन दक्षता और रखरखाव लागत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि इन दावों की वैज्ञानिक जांच और तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता बताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे सभी दावों को तथ्यात्मक मान लेना उचित नहीं होगा. कई संदेशों और वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र जांच आवश्यक है.
* केंद्र सरकार ने दी सफाई
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण कोई प्रयोग नहीं, बल्कि देश की घोषित राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है. कानून एवं न्याय मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस कार्यक्रम को चल रहा प्रयोग बताना पूरी तरह भ्रामक है. मंत्रालय के अनुसार, कुछ लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों की गलत व्याख्या की है. सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र को मजबूती देने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
* गडकरी पर ही क्यों केंद्रित है विवाद?
विश्लेषकों का मानना है कि इथेनॉल नीति केंद्र सरकार की सामूहिक ऊर्जा, पर्यावरण और कृषि नीति का हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक विमर्श में इसका पूरा केंद्र नितिन गडकरी बन गए हैं. यही कारण है कि सोशल मीडिया पर चल रहे विरोध अभियान को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसके पीछे केवल उपभोक्ता असंतोष है या फिर किसी संगठित लॉबी की भूमिका भी हो सकती है. फिलहाल इथेनॉल नीति को लेकर बहस जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, वाहन उद्योग और उपभोक्ता संगठनों के बीच चर्चा और तेज होने की संभावना है.





