हिरासत में मौत मामले में बड़ा फैसला
थानेदार समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद

*15 वर्ष पुराने बेंग्या पवन मौत प्रकरण में सजा
*वाशिम न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय
वाशिम/दि.2- वर्ष 2011 में रिसोड पुलिस थाने में हुई हिरासत में मौत के चर्चित मामले में वाशिम जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन थानेदार सहित नौ पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. न्यायालय के इस फैसले को पुलिस हिरासत में अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार 9 मई 2011 को डकैती के एक मामले में संदेह के आधार पर हिंगोली जिले के बेंग्या पवन और राजू पवार को पुलिस ने हिरासत में लिया था. आरोप है कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट और प्रताड़ना के कारण बेंग्या पवन की हिरासत में ही मौत हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपी गई थी. सीआईडी के तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक (डीवायएसपी) अनवर शेख ने मामले की जांच की. जांच के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत नष्ट करना), 330 और 331 (प्रताड़ना एवं जबरन बयान लेने के लिए चोट पहुंचाना) सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था.
न्यायालय ने सुनवाई के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी माधव धांडे, पुलिसकर्मी रमेश पवार, प्रकाश ताराम, चालक शिवाजी खिल्लारी, अशोक वैद्य, वसंत जाधव, पंजाब काकन, नागोराव खांडके तथा एक अन्य आरोपी पुलिस कर्मचारी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. करीब 15 वर्षों तक चले इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की भावना व्यक्त की जा रही है. वहीं न्यायालय के इस निर्णय को कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
यहां यह विशेष उल्लेखनिय पुलिस हिरासत के दौरान किसी संदेहीत आरोपी की मौत के मामले में थानेदार सहित नव पुलिस कर्मियों को एक साथ उम्र कैद की सजा सुनाए जाने का यह वाशिम जिले के इतिहास में अपनी तरह का पहला मामला है.





