राज्य में बनेंगे 8 नये फ्लाइंग स्कूल

एमएडीसी ने बनाई 6 विमानतलों पर नये एफटीओ बनाने की योजना

* पायलट प्रशिक्षण सुविधाओं का राज्य में होगा विस्तार
मुंबई /दि.11 – महाराष्ट्र विमानतल विकास कंपनी लिमिटेड (एमएडीसी) द्बारा राज्य के 6 विमानतलों पर नये वैमानिक प्रशिक्षण संस्था यानी एफटीओ स्थापित करने की योजना तैयार की गई है. जिसके चलते राज्य में जल्द ही 8 नये पायलट प्रशिक्षण केन्द्र शुरू होंगे. जिसकी वजह से राज्य में वैमानिक प्रशिक्षण की मुलभूत सुविधाओं के विस्तार को गति मिलेगी.
एमएडीसी की ई-निविदा के अनुसार नये प्रशिक्षण केन्द्रों की रचना, स्थापना, संचालन, देखभाल व हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार किसी निजी ऑपरेटर की सेवा लेना चाह रही है. इस योजना के तहत 8 नये एफटीओ स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है. जिनमें धाराशिव व यवतमाल में 2-2 तथा बारामती, धुलिया, कराड व लातूर में 1-1 एफटीओ स्थापित करने का समावेश है. इस विस्तार के चलते बारामती में पहले से कार्यरत दो एफटीओ तथा धुलिया, कराड व लातूर में पहले से कार्यरत एक-एक एफटीओ में भी नई क्षमता का निर्माण होगा. साथ ही धाराशिव एवं यवतमाल की विमानसेवा नहीं रहनेवाली प्रादेशिक हवाई पट्टियों पर प्राथमिक पायलट प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित होंगे.
ठेकेदार को निर्धारित भूखंड, हैंगर,एप्रन व पक्की जगह पर मर्यादित भाडे पट्टे का अधिकार मिलेगा. यह चयन प्रति उडान घंटे के लिए दिए जानेवाली सर्वोच्च सहूलियत वाले शुल्क के आधार पर की जायेगी. इसमें प्रति विमान प्रति उडान घंटे के लिए 825 रूपए की अनिवार्य न्यूनतम आरक्षित कीमत निश्चित की गई है. ऑपरेटर को प्रति विमानतल प्रतिवर्ष कम से कम 3 हजार उडान घंटे के गारंटी शुल्क की मर्यादा का पालन करना होगा. साथ ही ऑपरेटर को प्रति घंटा सहूलियत शुल्क व किराया शुल्क भरना होगा.
इसके साथ ही ऑपरेटर को सभी 6 विमानतलों पर पक्के निर्माण वाले क्षेत्र हेतु प्रति चौरस मीटर 331 रूपए व कच्चे क्षेत्र हेतु प्रति चौरस मीटर 275 रूपए का मासिक जमीन किराया शुल्क भी भरना होगा. इसके अलावा प्रत्येक विमान तल के लिए 10 लाख रूपए निश्चित मासिक मुलभूत सुविधा वं सेवा अद्यवतीकरण शुल्क भी लागू रहेगा. इस हेतु किराया करार की कालावधि 5 वर्ष के लिए वैध रहेगा तथा कामकाज के आधार पर एवं एमएडीसी के निरीक्षण के जरिए उसे आगे 5 वर्ष के लिए बढाया जा सकेगा. प्रत्येक विमानतल पर कम से कम तीन उडान भरने योग्य विमान रहनेवाले इच्छुक ही इस निविदा में हिस्सा लेने हेतु पात्र रहेंगे.

* क्या होगा फायदा
देश में अगले 5 वर्षो के दौरान 30 हजार से अधिक नये वैमानिकों यानी पायलटों की जरूरत महसूस होनेवाली है. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए इन प्रशिक्षण केन्द्रों की काफी मदद होगी.
इस समय लगभग 41 फीसद भारतीय युवाओं को कमर्शियल पायलट का लायसेंस मिलने हेतु विदेशी फ्लाइंग स्कूल में जाना पडता है. वहीं यदि देश में ही फ्लाइंग स्कूल की सुविधाएं बढती है तो विदेशों में होनेवाला विद्यार्थियों का पैसा बचेगा और देश का पैसा देश में ही रहेगा.
इस योजना के चलते राज्य के अंतर्गत क्षेत्रों में बिना किसी उपयोग के पडे रहनेवाले विमानतलों का उडान प्रशिक्षण के लिए बेहतर तरीके से प्रयोग किया जा सकेगा.
महाराष्ट्र में एमएडीसी द्बारा 12 फ्लाइंग स्कूल शुरू किए जाते ही देश में पायलट प्रशिक्षण क्षमता में प्रतिवर्ष 750 कैडेट्स का इजाफा होगा.

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