स्कूल से ही किताबें खरीदने की मजबूरी अब नहीं चलेगी

सीबीएसई और निजी स्कूलों पर होगी कार्रवाई

* विधानसभा में सरकार की घोषणा                                                                                                                                        मुंबई/दि.2- महाराष्ट्र में निजी तथा सीबीएसई संबद्ध स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्कूल से ही किताबें, कॉपियां और शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य किए जाने के मामलों पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल को विद्यार्थियों को किसी विशेष दुकान या स्कूल परिसर से ही पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है. शिकायत मिलने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे पर मंत्री दादा भुसे ने बताया कि राज्य के अनेक निजी और सीबीएसई स्कूलों द्वारा अभिभावकों से मनमाने दामों पर पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है. कई मामलों में स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही सामग्री खरीदने की अनिवार्यता लागू की गई है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
*कई स्कूलों को जारी किए गए नोटिस
शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि सरकार को इस संबंध में अनेक शिकायतें प्राप्त हुई हैं. प्रारंभिक जांच के बाद कुछ स्कूलों को नोटिस भी जारी किए गए हैं. उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है और किसी भी स्कूल को इस प्रकार की बाध्यता लागू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
* निगरानी के लिए बनेगी विशेष समिति
विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री पंकज भोयर ने घोषणा की कि ऐसे मामलों पर निगरानी रखने और शिकायतों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की जाएगी. यह समिति स्कूलों द्वारा की जा रही कथित मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर नजर रखेगी. विपक्षी और सत्तापक्ष के कई सदस्यों ने इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाजार में उपलब्ध पुस्तकों और स्कूलों द्वारा बेची जा रही पुस्तकों के दामों में काफी अंतर पाया जा रहा है, जिससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है.
* बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर भी सख्ती
विधानसभा में शिक्षा विभाग से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर जानकारी देते हुए दादा भुसे ने बताया कि इस वर्ष आयोजित दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में सामूहिक नकल तथा अन्य अनियमितताओं के मामलों में राज्यभर में 100 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है. उन्होंने बताया कि बारहवीं परीक्षा के दौरान विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर हुए गैरकानूनी कृत्यों के संबंध में कुल 15 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें अमरावती विभाग में 8, नागपुर में 3, छत्रपति संभाजीनगर में 3 तथा लातूर में 1 मामला दर्ज हुआ है.
मंत्री दादा भुसे के अनुसार, वर्ष 2026 की बारहवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल के कुल 1,469 मामले सामने आए हैं. वहीं, नकल से संबंधित सबसे अधिक 650 मामले अमरावती विभाग में तथा 501 मामले छत्रपति संभाजीनगर विभाग में दर्ज किए गए.
* अभिभावकों को मिली राहत
सरकार की इस घोषणा को अभिभावकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. लंबे समय से निजी स्कूलों द्वारा पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री निर्धारित स्थानों से खरीदने की अनिवार्यता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं. अब समिति गठन और कार्रवाई की घोषणा के बाद शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.

Back to top button