काडिला प्रकरण में हाईकोर्ट की एफडीए को फटकार
दवा बिक्री पर लगी रोक हटाने को तैयार हुआ विभाग

* कोर्ट ने कहा- पहले कार्रवाई, फिर जवाब मांगना कानून नहीं
मुंबई/दि.12- महाराष्ट्र अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा काडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर लगाई गई रोक को लेकर मुंबई हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने एफडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले गोली चलाओ और बाद में सवाल पूछो जैसी पद्धति कानून के शासन में स्वीकार्य नहीं हो सकती.
मामले की सुनवाई प्रभारी मुख्य न्यायाधीश आर. वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंकड की खंडपीठ के समक्ष हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने एफडीए की कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद विभाग ने काडिला के खिलाफ जारी बिक्री प्रतिबंध आदेश वापस लेने की तैयारी दर्शाई और भविष्य में कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का आश्वासन दिया.
बता दे कि, एफडीए ने काडिला फार्मास्युटिकल्स की कुछ दवाओं का स्टॉक जब्त कर उनकी बिक्री एवं वितरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे. इन आदेशों को चुनौती देते हुए कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत में पक्ष रखते हुए प्रतिबंध आदेशों को रद्द करने की मांग की. इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एफडीए की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत को कंपनी के आर्थिक नुकसान की चिंता नहीं है, लेकिन यह अत्यंत गंभीर विषय है कि मरीजों को लगभग 20 दिनों तक आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं. अदालत ने यह भी कहा कि प्रभावी रूप से यह अवधि 32 दिनों तक पहुंच गई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से चिंता का विषय है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए. बिना पर्याप्त सुनवाई के सीधे प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता.
हाईकोर्ट ने एफडीए को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना इस प्रकार के आदेश जारी किए गए तो विभाग पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है. अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद एफडीए ने आश्वासन दिया कि यदि भविष्य में कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई आवश्यक हुई तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी की जाएगी, कंपनी को लिखित जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
* आयुर्वेदिक दवा कंपनियों पर भी चल रही कार्रवाई
इसी बीच एफडीए राज्यभर में दवा निर्माण इकाइयों की जांच अभियान भी चला रहा है. हाल ही में विभाग ने 434 आयुर्वेदिक औषधि उत्पादक कंपनियों का निरीक्षण किया था. जांच में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर पुणे जिले की तीन कंपनियों के उत्पादन लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए गए हैं. बारामती की कृष्णा हर्बल, पुणे की कालिदास गांधी और जेजुरी की इंडू केयर फार्मा के खिलाफ की गई कार्रवाई को एफडीए की हालिया बड़ी कार्रवाइयों में शामिल माना जा रहा है. काडिला मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब एफडीए की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. वहीं विभाग के लिए यह मामला भविष्य की कार्रवाई में कानूनी सावधानी बरतने का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.





