टाटा स्टील के नाम पर नकली पत्रों का कारोबार!

बीड में जैन पत्रा उद्योग पर पुलिस और कंपनी अधिकारियों का छापा

* साधारण पत्रों पर टाटा का लोगो लगाकर बिक्री का आरोप, बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री जब्त
बीड/दि.4- बीड जिले में टाटा स्टील के नाम का कथित दुरुपयोग कर नकली पत्रों की बिक्री किए जाने के मामले ने सनसनी फैला दी है. जालना रोड स्थित जैन पत्रा उद्योग समूह पर टाटा स्टील के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त छापामार कार्रवाई की. गुरुवार रात से शुरू हुई जांच शुक्रवार तक जारी रही, जिससे जिले के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र में खलबली मच गई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार टाटा स्टील को शिकायत मिली थी कि कुछ व्यापारी साधारण स्टील पत्रों पर टाटा कंपनी का नाम और लोगो अंकित कर उन्हें असली टाटा उत्पाद बताकर बाजार में बेच रहे हैं. शिकायत के बाद मुंबई से टाटा स्टील की विशेष जांच टीम बीड पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से जैन पत्रा उद्योग परिसर में छापा मारा.
सूत्रों के मुताबिक कंपनी के अधिकारी पिछले चार दिनों से बीड में डेरा डाले हुए थे और मामले की गोपनीय जांच कर रहे थे. पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया. जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ ऐसे पत्रे मिले जिन पर टाटा कंपनी का नाम अंकित पाया गया. प्रथम दृष्टया यह मामला ब्रांड नाम के दुरुपयोग और उपभोक्ताओं को भ्रमित कर बिक्री करने से जुड़ा माना जा रहा है.
छापे के दौरान अधिकारियों ने गोदाम में रखे स्टील पत्रों, कच्चे माल और अन्य व्यावसायिक दस्तावेजों की जांच की. साथ ही कुछ संदिग्ध सामग्री और नमूनों को जब्त कर परीक्षण के लिए भेजा गया है. जब्त किए गए माल की तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित उत्पाद वास्तव में टाटा स्टील के हैं या उन पर अवैध रूप से कंपनी का नाम अंकित किया गया था. कार्रवाई के बाद टाटा स्टील के अधिकारी और स्थानीय पुलिस संबंधित व्यवसायियों से पूछताछ कर रहे हैं. मामले में कॉपीराइट, ट्रेडमार्क उल्लंघन, ब्रांड की नकल और उपभोक्ता धोखाधड़ी जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है.
इस छापेमारी के बाद बीड के व्यापारिक जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल पुलिस और कंपनी अधिकारियों की जांच जारी है तथा मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रांड नाम का दुरुपयोग न केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि ग्राहकों के साथ भी धोखाधड़ी का गंभीर मामला होता है.

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