कुंभ मेले के फंड में 241 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
विधायक अनिल परब ने एसआईटी जांच की मांग उठाई

मुंबई/दि.3- महाराष्ट्र विधान परिषद के मानसून सत्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक अनिल परब ने आगामी कुंभ मेले की तैयारियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा. उन्होंने नासिक में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए जारी किए गए टेंडरों में अनियमितताओं का दावा करते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों पर आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की.
विधायक अनिल परब ने आरोप लगाया कि कुंभ मेले के लिए नासिक जिले में लगभग 2,270 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों के टेंडरों में ठेकेदारों का एक गठजोड़ (कार्टेल) बनाया गया. उनके अनुसार, कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर 16 कंपनियों की कथित ‘रिंग’ तैयार की, जिससे पूर्व निर्धारित कंपनियों को ही ठेके दिए जा सकें. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2018 के सरकारी नियमों के अनुसार किसी एक निविदा में पात्र घोषित ठेकेदार को दूसरी निविदा में मनमाने ढंग से अपात्र नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन नियमों की अनदेखी कर पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया. परब ने आरोप लगाया कि कई निविदाओं में पात्र कंपनियों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया ताकि चुनिंदा कंपनियों को काम मिल सके.
विधान परिषद में बोलते हुए विधायक अनिल परब ने कहा कि कुंभ मेले जैसे धार्मिक आयोजन के नाम पर सार्वजनिक धन की लूट की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई निर्माण कार्य अभी पूरे भी नहीं हुए हैं और सड़कों में दरारें दिखाई देने लगी हैं. इस पूरे मामले की एसआईटी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. इसी दौरान उन्होंने मुंबई महानगरपालिका में विकास निधि के वितरण को लेकर भी सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया. परब का कहना था कि ठाकरे गुट के निर्वाचित नगरसेवकों को विकास कार्यों के लिए बेहद कम राशि दी गई, जबकि सत्ताधारी दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों को कहीं अधिक निधि आवंटित की गई.
इसके अलावा, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई 22 लोगों की मौत के मामले में भी उन्होंने सरकार को घेरा. विधायक परब ने कहा कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रही, जबकि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय संबंधित अधिकारियों को बचाने का प्रयास करती है, तो जनता में गलत संदेश जाएगा. परब ने कुंभ मेले की टेंडर प्रक्रिया, मुंबई महानगरपालिका के निधि वितरण और पुणे शराब कांड जैसे मामलों में पारदर्शी जांच की मांग दोहराई.





